मोदी कैबिनेट ने आज 10 हजार करोड़ की महत्वाकांक्षी गगनयान परियोजना को दी मंजूरी दे दी। अगर यह मिशन कामयाब हुआ तो अंतरिक्ष पर मानव मिशन भेजने वाला भारत दुनिया का चौथा देश होगा। पीएम मोदी ने कहा था कि यह मिशन 2022 तक पूरा होगा। इस प्रोजेक्ट में मदद के लिए भारत ने पहले ही रूस और फ्रांस के साथ करार किया है।
इसके तहत तीन सदस्यीय दल को कम से कम सात दिनों के लिए अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने स्वतंत्रता दिवस भाषण में गगनयान परियोजना की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि इस परियोजना को 2022 तक अमल में लाया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना में मदद के लिए भारत ने पहले ही रूस और फ्रांस के साथ समझौते किए हैं।
चंद्रयान-मंगलयान मिशन से भी बड़ा मिशन
मानव अंतरिक्ष मिशन बाकी मिशनों से बिल्कुल ही अलग तरह का है जो इसरो ने अब तक पूरा किया है। चंद्रयान और मंगलयान भी इसी तुलना में छोटे नजर आते हैं। इसरो के सामने सबसे बड़ी चुनौती ये है कि उसे न सिर्फ अंतरिक्ष में धरती जैसे वातावरण वाले यान को तैयार करना है बल्कि इसे वापस पृथ्वी पर लाने की चुनौती भी होगी। पिछले कई सालों में इसरो अब तक कई तकनीक ईजाद की है लेकिन अभी भी बहुत कुछ हासिल किया जाना बाकी है।
इसरो की ताकत
तीन दशकों की कोशिशों के बाद इसरो ने दिसंबर 2014 में GSLV MK-III का सफलतापूर्वक परीक्षण किया था जिसे अब LVM-3 (लॉन्च व्हीकल मार्क 3) के नाम से जाना जाता है। पिछले साल जून में इसरो ने LVM-3 को लॉन्च किया जो अपने साथ GSAT-19 लेकर अंतरिक्ष गया था।
LVM-3 ही वो यान है जो मानव को अंतरिक्ष में लेकर जाएगा। अगले कुछ सालों में जीएसएलवी की कई उड़ानें प्रस्तावित हैं। इससे इसरो को क्रायोजेनिक तकनीक को और मजबूत करने में मदद मिलेगी जिससे अंतरिक्ष में और भारी पेलोड्स भेजे जा सकेंगे। 6 जून को सरकार ने GSLV MK-III की 10 उड़ानों के लिए 4338.2 करोड़ का बजट रखा था। साल 2024 में GSLV MK-III मिशन के मद्देनजर यह बजट तय किया गया था।
GSLV MK-III की पहली प्रायोगिक उड़ान 18 दिसंबर 2014 को सफलतापूर्व अंजाम दिया गया था। अंतरिक्ष में 126 किमी. ऊंचाई पर उड़ान भरने के बाद यह वापस धरती पर लौट आया था। इसे क्रू मॉड्यूल एटमोस्फेरिक रीएंट्री एक्सपेरीमेंट (CARE) नाम दिया गया था, ये यान अंदमान निकोबार द्वीप में उतारा गया था।
ट्रेनिंग का खाका
अंतरिक्ष में जाने वाले एस्ट्रोनॉट्स को ट्रेनिंग देने के लिए बैंगलोर में ट्रेनिंग सेंटर खोला जाएगा। पहले इसका लक्ष्य 2012 तय किया गया था। अब इसरो एक स्थायी सेंटर खोलने की योजना बना रहा है। बताया जा रहा है कि गगनयान मिशन के लिए चुने जाने वाले लोगों को विदेशी सेंटर में ट्रेनिंग दी जाएगी। इन्हें करीब दो साल तक शून्य गुरुत्वाकर्षण पर ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि वह अंतरिक्ष में होने वाले अनुभवों से दो चार हो जाएं। ट्रेनिंग का कुछ हिस्सा बैंगलोर में वायु सेना के इंस्टीट्यूट ऑफ एयरोस्पेस मेडिसीन में पूरा कराया जाएगा। अभी तक उम्मीदवारों के चयन का काम शुरू नहीं हुआ है।
इसरो के चेयरमैन के सिवन ने बैंगलोर में पत्रकारों से कहा था कि भारत का पहला मानव मिशन करीब 7 दिन तक चलेगा।