कांग्रेस इस ओर दो रास्ते तलाश रही है। पहला कि यह साबित कर दे कि सरकार कोई काम नहीं कर रही है और दूसरा, उसके सहयोगी दलों को अपनी ओर लाना। इससे पहले कांग्रेस कर्नाटक चुनाव के समय भी यह दांव खेल चुकी है और उसमें सफल भी रही। पार्टी ने छोटे सहयोगी दल के नेता को मुख्यमंत्री बना दिया।
भाजपा के लिए परिकर का खराब स्वास्थ्य नाकामियाबी बन रहा है। अगर सरकार गिर गई तो 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले ही पार्टी एक राज्य खो देगी। लेकिन भाजपा के नेता पांच कारणों से किसी भी तरह के बदलाव के लिए मना कर रहे हैं। पहला, सरकार बहुमत के साथ ही रहेगी।
दूसरा, सहयोगी दलों का साथ अभी भी पार्टी के पास है। तीसरा, कोई संवैधानिक संकट खड़ा नहीं हो रहा है जिसके चलते मुख्यमंत्री को बदला जाए। चौथा, कांग्रेस ज्यादा ही आगे जाने का सोच रही है, जबकि अंकगणित में कोई बदलाव नहीं हुआ है। पांचवां, फैसला राज्यपाल करेंगी, ऐसी कोई संभावना नहीं है कि वह भाजपा के खिलाफ में फैसला दें।
परिकर का स्वास्थ्य अभी ठीक नहीं है, जिसके चलते गोवा में राजनीतिक उठापटक तेज हो गई है। अभी तक कुछ नहीं कहा जा सकता कि सरकार ऐसे ही चलती रहेगी, जबकि उसके नेता काफी समय से अस्वस्थ्य हैं। या फिर राष्ट्रपति शासन के बाद जल्दी चुनाव होंगे।
जीएफपी के तीन विधायकों, तीन निर्दलीयों ने गोवा में भाजपा को समर्थन जताया
वहीं गोवा फारवार्ड पार्टी (जीएफपी) के तीन विधायकों और तीन निर्दलीय विधायकों ने इस तटीय राज्य में अपनी सरकार के स्थायित्व की कोशिश में जुटी भाजपा के प्रति अपना समर्थन प्रकट किया। जीएफपी के प्रमुख विजय सरदेसाई और पार्टी के दो अन्य विधायक तथा तीन निर्दलीय विधायक रविवार को जब भाजपा के केंद्रीय पर्यवेक्षकों से मिलने पहुंचे तब उन्होंने अपनी एकजुटता प्रदर्शित की।
राज्य के कृषि मंत्री सरदेसाई गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के विश्वासपात्र समझे जाते हैं। दिन में इससे पहले सरदेसाई ने कहा था कि जीएफपी पर्रिकर के साथ हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हम किसी से बात नहीं कर रहे हैं और न कि कोई हमसे बात कर रहा है।’’