चुनाव आयोग ने गुजरात विधानसभा चुनाव 2017 की तारीखों का ऐलान कर दिया है। तारीखों के ऐलान के साथ ही राज्य में आचार संहिता लागू हो गई। चुनाव आयुक्त ने साफ किया है कि यह आचार संहिता केंद्र सरकार के लिए भी लागू है।
ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल उठता है कि यह आचार संहिता आखिर होती क्या है? दरअसल, चुनाव की प्रक्रिया को अच्छे से निपटाने के लिए चुनाव आयोग कुछ गाइडलाइंस तैयार करता है और जहां भी चुनाव होने होते हैं वहां तारीखों के ऐलान के साथ ही उनको लागू कर देता है।
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माना जाता है कि यह स्थिति को बिगड़ने से रोकने के लिए होती है, जैसे इस बीच कोई नेता भड़काऊ भाषण नहीं दे सकता जिससे स्थिति बिगड़ने के हालात बनें।
क्या-क्या हैं गाइडलाइंस?
डेमो पिक
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1. चुनावी गतिविधि के दौरान सरकार किसी तरह की भर्तियों का ऐलान नहीं कर सकती।
2. अपने विपक्ष में खड़े उम्मीदवारों का भी सम्मान करना होता है, उनके घर के बाहर शक्ति प्रदर्शन करना और रैली निकालने से बचना होता है।
3. जो भी रैली की जाएं वह सड़क यातायात को प्रभावित ना करें।
4. चुनाव आयोग ने शराब बांटने पर भी पाबंदी लगा रखी है, लेकिन यह फिर भी खुलकर होता है।
5. किसी तरह की नई स्कीम का ऐलान नहीं किया जा सकता, इसमें सड़क निर्माण, पीने के पानी से सबंधित कोई योजना समेत कई चीजें शामिल हैं।
6. आचार संहिता के मुताबिक, रैली के लिए ग्राउंड्स, हेलीपैड्स, सरकारी गेस्ट हाऊस और बंगलों का सभी उम्मीदवारों में बराबर बंटवारा करना होता है।