चुनाव आचार संहिता का मतलब है चुनाव आयोग के वे निर्देश जिनका पालन चुनाव खत्म होने तक हर पार्टी और उसके उम्मीदवार को करना होता है। अगर कोई उम्मीदवार इन नियमों का पालन नहीं करता तो चुनाव आयोग उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकता है, उसे चुनाव लड़ने से रोका जा सकता है, उम्मीदवार के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो सकती है और दोषी पाए जाने पर उसे जेल भी जाना पड़ सकता है।
राज्यों में चुनाव की तारीखों के एलान के साथ ही उस राज्य में चुनाव आचार संहिता भी लागू हो जाती है। चुनाव आचार संहिता के लागू होते ही प्रदेश सरकार और प्रशासन पर कई अंकुश लग जाते हैं। सरकारी कर्मचारी चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक निर्वाचन आयोग के कर्मचारी बन जाते हैं। वे आयोग के मातहत रहकर उसके दिशा-निर्देश पर काम करते हैं।
यहां महत्वपूर्ण हो जाता है यह जानना भी कि आचार संहिता लागू होते ही प्रदेश का मुख्यमंत्री या मंत्री जनता के लिए कोई घोषणा नहीं कर सकते हैं। इस दौरान राज्य में न तो शिलान्यास किया जाता है न लोकार्पण और न ही भूमिपूजन।
इस दौरान सरकारी खर्च से ऐसा आयोजन नहीं किया जाता है जिससे किसी भी दल विशेष को लाभ पहुंचता हो। राजनीतिक दलों के आचरण और क्रियाकलापों पर नजर रखने के लिए चुनाव आयोग पर्यवेक्षक नियुक्त करता है।
Election Commission of India, Supreme Court of India
वर्ष 2000 में केंद्रीय सरकार और चुनाव समिति के बीच आचार संहिता को लेकर काफी बहस हुई। केंद्र सरकार चुनाव की तारीख की घोषणा होते ही आचार संहिता लागू होने के चुनाव समिति के फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी गयी।
सरकार का कहना था की औपचारिक अधिसूचना के बाद ही आचार संहिता लागू की जाये। चुनाव समिति ने मामले को सुलझाने के लिए सभी राजनीतिक पार्टियों को एकत्रित किया और बाद में भाजपा समेत देश की सभी राजनीतिक पार्टियों ने आचार संहिता का समर्थन किया और तभी से चुनाव की तारीख घोषित किए जाने के साथ ही देश और राज्य में आचार संहिता लागू कर दी जाती है।
-राजनीतिक पार्टियों के प्रत्याशी अपने प्रतिद्वंदी दलों के निजी जीवन का सम्मान करें और उनके घर के सामने किसी प्रकार का रोड शो या प्रदर्शन करके उन्हें परेशान न करें।
-चुनाव प्रचार के दौरान कोई भी राजनीतिक पार्टी और उनके प्रत्याशियों को लाउड स्पीकर इस्तेमाल करने से पहले स्थानीय अधिकारीयों से अनुमति लेना अनिवार्य होता है। किसी प्रकार के अभियान से पहले प्रत्याशी स्थानीय पुलिस को जरूर सूचित करें ताकि सुरक्षा के इंतजाम किये जा सकें।
-राजनीतिक दलों को यह ध्यान रखना होता है कि उनके द्वारा आयोजित रैलियों और रोड शो से यातायात प्रभावित नहीं होना चाहिए।
-आचार संहिता का सबसे महत्वपूर्ण निर्देश है की प्रत्याशी किसी भी कीमत पर मतदाताओं किसी प्रकार का प्रलोभन नहीं दे सकते हैं। अक्सर प्रत्याशियों द्वारा मतदाताओं को शराब वितरण और पैसे सहित गई प्रकार के उपहार देने की बात सामने आती है। वह करना पूरी तरह से वर्जित है।
-आचार संहिता के अनुसार सार्वजानिक स्थान जैसे सरकारी सराय, मीटिंग मैदान और हेलिपैड आदि सभी राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों के बीच बराबरी में उपयोग किया जाए। उस पर एकाधिकार न जताया जाए।
-चुनाव के दिन प्रत्याशी अपने राजनीतिक दल का चिन्ह पोलिंग बूथ के आस-पास नहीं दिखा सकते। चुनाव समिति द्वारा दिए गए वैद्य पास के बगैर कोई भी बूथ में नहीं घुस सकता।
-चुनाव बूथ के पास एक व्यक्ति ऐसा होगा जिसके पास किसी प्रकार की शिकायत की जानकारी दी जा सकती है।
-शासक दल के मंत्री खास तौर पर किसी भी अधिकारी की नियुक्ति नहीं कर सकते जो मतदाताओं को उनके दल को मत देने की और प्रभावित करे।