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बाबा रामदेव का मेगा फूड पार्क है क्या?

Wed, 06 Jun 2018 04:02 PM IST
बीबीसी हिंदी
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बाबा रामदेव - फोटो : AFP
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मंगलवार रात समाचार चैनलों ने ब्रेकिंग न्यजू का फ्लैश दिखाना शुरू किया, 'बाबा रामदेव का मेगा फूड पार्क यूपी से बाहर शिफ्ट होगा।'
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आगे लिखा था, 'आचार्य बालकृष्ण उत्तर प्रदेश सरकार के रवैये से नाराज।'

बाबा रामदेव के पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड ने योगी आदित्यनाथ सरकार की तरफ से मंजूरी ना मिलने के बाद ग्रेटर नोएडा में बनने वाले प्रस्तावित फूड एंड हर्बल पार्क को शिफ्ट करने की बात कही।

क्या कहा बालकृष्ण ने?

कंपनी के सर्वेसर्वा आचार्य बालकृष्ण ने ट्वीट किया, ''आज ग्रेटर नोएडा में केन्द्रीय सरकार से स्वीकृत मेगा फूड पार्क को निरस्त करने की सूचना मिली। श्रीराम व कृष्ण की पवित्र भूमि के किसानों के जीवन में समृद्धि लाने का संकल्प प्रांतीय सरकार की उदासीनता के चलते अधूरा ही रह गया #पतंजलि ने प्रोजेक्ट को अन्यत्र शिफ्ट करने का निर्णय लिया।''
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बालकृष्ण ने इस मेगा फूड पार्क की प्रतीकात्मक तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, ''यह था पतंजलि फूडपार्क Noida के प्रस्तावित विशाल संस्थान का स्वरूप, जिससे मिलता हजारों लोगों को रोजगार तथा जिससे प्राप्त होता लाखों किसानों को समृद्धशाली जीवन...''

जाहिर है, आचार्य बालकृष्ण के इस तरह से बयान देने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से कोई न कोई कदम उठाया जाना ही था। और वही हुआ।

क्या है बाबा रामदेव का मेगा फूड पार्क प्रोजेक्ट?

पतंजलि फूड पार्क नोएडा - फोटो : TWITTER/@ACH_BALKRISHNA
क्या है ये प्रोजेक्ट?

बुधवार सवेरे खबर आई है कि इस विवाद के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बातचीत की और इस बारे में जल्द से जल्द फैसला करने का वादा किया।

लेकिन ये मेगा प्रोजेक्ट है क्या, जिसे लेकर ये विवाद खड़ा हो गया है। बाबा रामदेव, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीब माने जाते हैं और उत्तर प्रदेश में भी भाजपा का शासन है, ऐसे में इस परियोजना को लेकर खुलेआम इस तरह की बयानबाजी हैरान करती है।

साल 2016 में उत्तर प्रदेश में तत्कालीन सपा सरकार के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पतंजलि के मेगा फूड पार्क की नींव रखी थी। इसे 1666.8 करोड़ रुपए के निवेश से तैयार किया जाना था।

प्रोजेक्ट से जुड़े दावे-वादे

ये मेगा फूड पार्क 455 एकड़ में बनना है और ऐसा दावा किया गया था कि इसके शुरू होने के बाद 8 हजार से ज्यादा लोगों को सीधे तौर पर रोजगार मिलेगा।

हिंदुस्तान टाइम्स (एचटी) की खबर के मुताबिक यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (YEIDA) के अधिकारियों ने बताया था कि ये जमीन इंस्टीट्यूशनल और इंडस्ट्रियल इस्तेमाल के लिए आवंटित की गई है।

एचटी ने YEIDA के एडिशनल चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर अमरनाथ के हवाले से कहा था, ''उत्तर प्रदेश सरकार ने अलॉटमेंट लेटर जारी कर दिया है, जिसमें योग गुरु बाबा रामदेव की पतंजलि योगपीठ को 455 एकड़ जमीन दी गई है।''

''हमने 430 एकड़ इंडस्ट्रियल इस्तेमाल और 25 एकड़ संस्थागत इस्तेमाल के लिए दी गई है। बाबा रामदेव की वहां यूनिवर्सिटी और रिसर्च सेंटर बनाने की योजना है।''
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कहां है ये प्रस्तावित फूड पार्क

पतंजलि फूड एंड हर्बल पार्क - फोटो : TWITTER/@ACH_BALKRISHNA
165 किलोमीटर लंबे यमुना एक्सप्रेसवे का नियंत्रण YEIDA के हाथों में है। जिस जगह पतंजलि योगपीठ ने ये मेगा फूड पार्क बनाने की योजना बनाई है, वो सेक्टर 24, 24ए और 22बी में है। ये यमुना एक्सप्रेसवे से जुड़ने वाली 120 मीटर चौड़ी सड़क से सटा है।

ये जगह बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट से करीब चार किलोमीटर की दूरी पर है। यमुना एक्सप्रेसवे ग्रेटर नोएडा को आगरा और उससे आगे लखनऊ से जोड़ता है।

जब इस परियोजना को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार और पतंजलि योगपीठ के बीच बातचीत चल रही थी, तो बाबा रामदेव के सहयोगियों ने बताया था कि वो मार्च 2018 से यहां कामकाज शुरू करने की योजना बना रहे हैं।

पतंजलि योगपीठ का दावा था कि 1600 करोड़ रुपए के इस प्रोजेक्ट से 50 हजार स्थानीय किसानों को फायदा होगा क्योंकि वो इनसे घी, तेल आदि खरीदेगी।
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