उन्होंने कहा कि पिछले चार साल में एक लाख मेगावाट बिजली क्षमता जोड़ी गयी और एक लाख सर्किट किलोमीटर अंतर-राज्यीय पारेषण क्षमता सृजित हुई। मार्च 2018 में कुल उत्पादन क्षमता 3,44,000 मेगावाट पहुंच गयी जो मार्च 2014 में 2,43,029 मेगावाट थी। पिछले साल सितंबर के अंतिम में सौभाग्य योजना शुरू किये जाने के बाद से अब तक लगभग 67.34 लाख घरों को बिजली पहुंचायी गयी है।
मंत्री ने बताया कि पिछले साल के मुकाबले कोयला आपूर्ति में 14 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे सिंह ने कहा कि अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में भी हमारी क्षमता पिछले चार साल में दोगुनी होकर 70,000 मेगावाट पहुंच गयी है।
सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता 2013-14 के 2,630 मेगावाट से बढ़कर मार्च 2018 में 22,000 मेगावाट तथा पवन ऊर्जा इसी अवधि में 21,000 मेगावाट से बढ़कर 34,000 मेगावाट पहुंच गयी है। सरकार ने 2022 तक अक्षय ऊर्जा स्रोतों से 1,75,000 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता का लक्ष्य रखा है।