अधिकांश गर्ल्स नाम बदलकर ही गुलाबी धंधे में कदम रखती हैं
रमेश नगर के एक स्पा सेंटर पर काम करने वाली एक युवती का कहना है कि अधिकांश लड़कियां अपना नाम बदलकर इस धंधे में आती हैं। चूंकि सभी मसाज गर्ल्स घर पर या परिचितों को यही बताती है कि वह किसी दफ्तर में काम करती है।
कुछ लड़कियां ब्यूटीपार्लर का नाम लेती हैं। स्पा सेंटर पर काम करना, यह एक राज ही रहता है। एक सवाल के जवाब में उसने कहा, यह चलन बढ़ता जा रहा है। पहले एक इलाके में इक्का-दुक्का स्पा सेंटर ही दिखता था, अब इनकी भरमार हो चली है।
मसाज गर्ल्स का जो साक्षात्कार होता है, उस बारे में न पूछें
पंजाबी बाग इलाके के स्पा सेंटर की मसाज गर्ल्स ने बताया कि जॉब लेने से पहले हमारा भी साक्षात्कार होता है। स्पा सेंटर मालिक कई दफा तो दूसरी बार भी बुला लेता है। इसमें ग्राहक कोई दूसरा नहीं होता, बल्कि सेंटर मालिक या उसका पार्टनर रहता है। अगर कोई लड़की फुल एक्स्ट्रा सर्विस नहीं करेगी तो उसकी जॉब खटाई में पड़ जाती है। आजकल नई लड़कियां ही इस धंधे में ज्यादा आ रही हैं। अगर किसी मसाज गर्ल्स से कोई ग्राहक खुश होता है तो वह अगली बार रिसेप्शन पर उसी से मसाज लेने की बात कहता है।
एक साल पहले तक हमें सेलरी मिलती थी, मगर अब नहीं
ग्रीन पार्क मे चल रहे एक स्पा सेंटर की मसाज गर्ल्स बताती है कि पहले सभी लड़कियों को सेलरी मिलती थी। प्रतिमाह 10-15 हजार रुपये दिए जाते थे। अब वह सब बंद हो गया है। रिसेप्शन पर ग्राहक से 1-2 हजार रुपये लेकर उन्हें रुम में भेज दिया जाता है। मसाज गर्ल्स को अंदर ही सेटिंग करनी होती है।
अगर कोई ग्राहक किसी भी तरह की कोई एक्स्टा सर्विस नहीं लेता है तो वह पांच सौ रुपये की टिप तो दे ही देता है। आजकल केवल मसाज कराने वाले लोग गिनती के ही बचे हैं। हमे पता है कि हर ग्राहक को एक्स्ट्रा सर्विस चाहिए। ऐसे में एक ग्राहक से हम दो हजार रुपये से लेकर पांच हजार रुपये तक ले लेती हैं। एक दिन में तीन-चार ग्राहक तो मिलते ही हैं।
स्पा सेंटरों के गुलाबी धंधे का रेट इलाके के अनुसार तय होता है। हौजखास, साकेत, मालवीय नगर, ग्रीनपार्क, महिपालपुर, लाजपत नगर और ग्रेटर कैलाश आदि इलाकों में प्रवेश शुल्क यानी जो रुपये रिसेप्शन पर दिये जाते हैं, वह करीब दो हजार रुपये है। द्वारका मेट्रो लाइन पर बने स्पा सेंटरों में यह शुल्क आठ सौ रुपये से लेकर दो हजार रुपये तक रहता है।
अब अधिकांश जगहों पर हजार-पंद्रह सौ रुपये ही प्रवेश शुल्क लग रहा है। कालकाजी इलाके में लंबे समय से स्पा सेंटर चला रहे एम. शकील का कहना है कि दिल्ली में करीब आठ सौ स्पा सेंटर हैं।
पंजाबी बाग क्लब रोड पर ही डेढ़ सौ से ज्यादा स्पा सेंटर खुले हैं। एक सेंटर पर कम से कम पांच-सात लड़कियों का स्टाफ रहता है। रात तक एक मसाज गर्ल्स पांच हजार रुपये तो कमा ही लेती है। कई बार कोई ग्राहक ऐसा भी मिल जाता है जो अकेले ही इतनी राशि बतौर टिप दे देता है।
अगर सभी सेंटरों को देखें तो यह कारोबार रोजाना चार करोड़ और प्रति माह 120 करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है। अब ऐसे ही स्पा सेंटरों की कमाई की बात करते हैं। जो राशि केवल रिसेप्शन पर दी जाती है, अगर उसे मिलाएं तो रोजाना एक करोड़ बीस लाख रुपये बनते हैं।
प्रतिमाह यह राशि तीस करोड़ से ज्यादा की बैठती है। जीएसटी का कहीं कोई चक्कर नहीं होता। ग्राहक को खुश करने के लिए कहा जाता है कि चलो हमने जीएसटी छोड़ दिया है। हालांकि ज्यादातर जगहों पर ग्राहक नकद पेमेंट करता है।
सिविक एजेंसियां और पुलिस...सब सेटिंग का खेल है
दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने कई माह पहले दिल्ली पुलिस, श्रम विभाग और सिविक एजेंसियों से उनके इलाके में चलने वाले स्पा सेंटरों की सूची मांगी थी। कितनों के पास लाइसेंस है, 2016 के बाद कितनों के खिलाफ कार्रवाई हुई है, स्पा सेंटरों का निरीक्षण कौन करेगा, आदि जानकारी देने के लिए कहा गया था। इन सब बातों को लेकर 28 नवंबर तक रिपोर्ट मांगी गई थी।
आयोग का कहना है कि अभी ऐसी कोई हमारे पास नहीं आई है। दूसरी ओर, स्पा सेंटर संचालकों का कहना है कि दिल्ली के सभी इलाकों में चल रहे सेंटर सेफ़ हैं। यहां रेड का कोई चक्कर ही नहीं है। तय समय पर सभी के पास उनका हिस्सा पहुंच जाता है। ऐसा नहीं है कि किसी को कुछ पता नहीं है, सब जानते हैं कहां क्या चल रहा है। सेटिंग तो हर जगह रखनी पड़ती है।