जनरेटिव एआई आने के बाद हमने मशीनों को सोचने, समझने और याद रखने की ताकत देने की दिशा में एक बड़ी छलांग लगाई है। चैटबॉट अब सवालों के जवाब दे सकते हैं, डॉक्यूमेंट्स को पढ़ सकते हैं, तस्वीरों को अच्छे से समझ सकते हैं और इंसानों की भाषा में बातचीत कर सकते हैं। दिन प्रतिदिन एआई का यह डिजिटल दिमाग तेजी से ताकतवर हो रहा है। वहीं अब अगली बड़ी चुनौती कुछ और है इस दिमाग को शरीर देना।
आसान भाषा में कहें तो अब बारी मशीनों की मसल पावर की है। यही वजह है कि ह्यूमनॉइड रोबोट को लेकर चर्चाएं इन दिनों खूब हो रही हैं। ह्यूमनॉइड रोबोट को लेकर दुनिया की टेक कंपनियों और निवेशकों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ रही है। लक्ष्य सिर्फ ऐसा रोबोट नहीं बनाना है, जो केवल इंसानों की तरह दिखे। असली उद्देश्य एक ऐसा सिस्टम तैयार करना है जो आसपास की दुनिया को देख सके, समझ सके, फैसला ले सके और फिर अपने हाथ-पैर से उस फैसले को जमीन पर अंजाम दे सके।
अब तक ज्यादातर रोबोट एक खास काम करने के लिए बनाए जाते रहे हैं। कोई रोबोट कार के एक हिस्से को जोड़ता है, कोई सामान उठाता है और कोई वेल्डिंग करने का काम करता है। इन रोबोट्स की सबसे बड़ी ताकत इनकी तेजी और सटीकता है। ये रोबोट उसी काम को अच्छे से करते हैं, जिसके लिए इन्हें डिजाइन किया गया है। ह्यूमनॉइड रोबोट इस मॉडल को बदलने की कोशिश कर रहा है।