फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स

एक्सप्लेनर: क्या हैं ग्रीन पटाखे, दिवाली पर जिनके इस्तेमाल की मिली 'सुप्रीम' मंजूरी, आम पटाखों से कितने अलग?

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Mon, 02 Nov 2026 06:00 PM IST

सार

ग्रीन पटाखे क्या हैं? यह कैसे बनते हैं? पारंपरिक पटाखों और ग्रीन पटाखों में फर्क क्या है? सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली पर इनके इस्तेमाल को लेकर क्या कहा है? इन्हें बेचने और खरीदने से जुड़े नियम क्या हैं? आइये जानते हैं...
विज्ञापन
विज्ञापन
ग्रीन पटाखों पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला। - फोटो : अमर उजाला
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में दिवाली के मौके पर ग्रीन पटाखे चलाने की इजाजत दे दी है। 7 नवंबर को छोटी दिवाली और 8 नवंबर को दिवाली के त्योहार के दिन दिल्ली और आसपास के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में यह छूट दी गई है। हालांकि, इसके लिए कुछ समयसीमाएं और पटाखों की खरीद-बिक्री से जुड़े नियम भी लागू किए गए हैं। 

सुप्रीम कोर्ट ने ग्रीन पटाखों को लेकर क्या ताजा फैसला दिया है? यह ग्रीन पटाखे क्या होते हैं? दिल्ली में खराब हवा के बीच ग्रीन पटाखे किस तरह पारंपरिक पटाखों के मुकाबले प्रदूषण को सीमित रखने में भूमिका निभा सकते हैं? इनकी खरीद और बिक्री से जुड़े नियम क्या हैं और अगर इन नियमों को नहीं माना गया तो कानूनी तौर पर क्या कार्रवाई हो सकती है? आइये जानते हैं...
विज्ञापन

ग्रीन पटाखों पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला। - फोटो : अमर उजाला
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में दिवाली के मौके पर ग्रीन पटाखे चलाने की इजाजत दे दी है। 7 नवंबर को छोटी दिवाली और 8 नवंबर को दिवाली के त्योहार के दिन दिल्ली और आसपास के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में यह छूट दी गई है। हालांकि, इसके लिए कुछ समयसीमाएं और पटाखों की खरीद-बिक्री से जुड़े नियम भी लागू किए गए हैं। 

सुप्रीम कोर्ट ने ग्रीन पटाखों को लेकर क्या ताजा फैसला दिया है? यह ग्रीन पटाखे क्या होते हैं? दिल्ली में खराब हवा के बीच ग्रीन पटाखे किस तरह पारंपरिक पटाखों के मुकाबले प्रदूषण को सीमित रखने में भूमिका निभा सकते हैं? इनकी खरीद और बिक्री से जुड़े नियम क्या हैं और अगर इन नियमों को नहीं माना गया तो कानूनी तौर पर क्या कार्रवाई हो सकती है? आइये जानते हैं...

पहले जानें- ग्रीन पटाखों को लेकर क्या है सुप्रीम कोर्ट का फैसला?

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण और उत्सव के बीच संतुलन बनाने के मकसद से प्रमाणित ग्रीन पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल की इजाजत दी है। हालांकि, कुछ सख्त शर्तों के साथ। 

समय और तिथियों का निर्धारण: सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों के उपयोग के लिए समय सीमित किया है। दिवाली के एक दिन पहले और दिवाली के दिन पटाखे फोड़ने के लिए सुबह 6:00 बजे से 7:00 बजे और रात 8:00 बजे से 10:00 बजे तक का समय तय किया गया है। निर्धारित अवधि खत्म होते ही पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध फिर से लागू हो जाता है।

नो-क्रैकर जोन का निर्धारण: अस्पतालों, नर्सिंग होम, प्राथमिक-जिला स्वास्थ्य केंद्रों, वृद्धाश्रमों, शैक्षिक संस्थानों और अधिसूचित साइलेंस जोन के 300 मीटर के दायरे में पटाखे फोड़ने पर पूरी तरह रोक है। इन क्षेत्रों को जमीन पर चिह्नित कर 'नो-क्रैकर जोन' के रूप में घोषित और सार्वजनिक करने का निर्देश दिया गया है।

बिक्री पर नियम और ऑनलाइन बिक्री पर रोक: ग्रीन पटाखों की बिक्री सिर्फ लाइसेंस प्राप्त कारोबारियों और प्रशासन की ओर से निर्धारित स्थानों/बाजारों से ही की जा सकती है। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से पटाखों की ऑनलाइन बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। साथ ही, दिल्ली-एनसीआर के बाहर से पटाखे लाने व खरीदने पर भी रोक लगाई गई है।

सुरक्षा राशि और लाइसेंस रद्दीकरण: दिल्ली-एनसीआर में निर्माताओं और व्यापारियों के लिए वित्तीय सुरक्षा राशि जमा करना अनिवार्य किया गया है; नियमों का उल्लंघन करने पर यह राशि जब्त कर ली जाएगी। यदि किसी निर्माता के ग्रीन पटाखे नकली पाए जाते हैं, तो उसका लाइसेंस रद्द करने का आदेश है।

अदालत ने ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल और इस पर सीमाएं लगाने को एक संतुलित दृष्टिकोण बताया, ताकि पर्यावरण से समझौता किए बिना सीमित उत्सव की अनुमति दी जा सके। कोर्ट का यह भी मानना था कि बाहर से अवैध रूप से तस्करी कर लाए जाने वाले पारंपरिक पटाखे ग्रीन पटाखों की तुलना में कहीं ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं।

ग्रीन पटाखे क्या होते हैं, कैसे बनते हैं? 

ग्रीन पटाखे कम उत्सर्जन करने वाले पर्यावरण-अनुकूल पटाखे हैं, जिन्हें वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (CSIR-NEERI) की ओर से खास वैज्ञानिक फॉर्मूलेशन और तकनीकों के आधार पर तैयार किया जाता है। 

ये भी पढ़ें: दिल्ली-एनसीआर में ग्रीन पटाखे जलाने की मिली अनुमति: सुप्रीम कोर्ट ने तय किया समय; किन जगहों पर रहेगा प्रतिबंध?

ग्रीन पटाखों को बनाने का तरीका। - फोटो : अमर उजाला
.

ग्रीन कैकर्स किस फॉर्मूले से बनते हैं। - फोटो : अमर उजाला

पारंपरिक पटाखे क्या होते हैं, यह कैसे बनते हैं?

  • पारंपरिक पटाखे पारंपरिक रासायनिक फॉर्मूलेशन और कच्चे माल से तैयार किए जाते हैं, जो जलने पर जबरदस्त धुआं, राख और पार्टिकुलेट मैटर (पीएम 2.5 और पीएम 10) छोड़ते हैं।
  • इनमें मुख्य रूप से बेरियम, सीसा/लेड, आर्सेनिक और पारा/मर्करी जैसी धातुएं शामिल होती हैं। सामान्य पटाखों के पारंपरिक फॉर्मूले में उच्च स्तर पर एल्युमिनियम का उपयोग किया जाता है।
  • पारंपरिक पटाखों में रासायनिक प्रतिक्रिया लिए पोटैशियम नाइट्रेट और सल्फर का इस्तेमाल होता है। इनके जलने पर भारी धुआं, सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी हानिकारक गैस निकलती हैं।
  • पारंपरिक पटाखों का खोल बड़ा होता है और इनमें बड़ी मात्रा में कच्चे माल तथा राख का इस्तेमाल किया जाता है, जिसके कारण जलने के बाद भारी अवशेष बचता है।

पारंपरिक पटाखों से कितने अलग होते हैं ग्रीन पटाखे?

  • ग्रीन पटाखों में राख का इस्तेमाल नहीं किया जाता, इनका खोल छोटा होता है और कम कच्चे माल का उपयोग होता है।
  • पारंपरिक पटाखों की तुलना में ग्रीन पटाखे कम शोर पैदा करते हैं और नियंत्रित लौ के साथ कम अवधि तक जलते हैं।
  • ग्रीन पटाखों के स्वीकृत फॉर्मूलेशन में बेरियम, सीसा, आर्सेनिक और पारा जैसी जहरीली भारी धातु नहीं होतीं। इससे प्रदूषण की गुंजाइश कम रहती है।
  • पारंपरिक भारी धातुओं के साथ इनमें रासायनिक मिश्रण में एल्युमिनियम की मात्रा को काफी कम रखा जाता है।
  • उत्सर्जन को नियंत्रित करने के लिए निर्माण प्रक्रिया में जिओलाइट और आयरन ऑक्साइड जैसे मल्टीफंक्शनल एडिटिव्स मिलाए जाते हैं।
  • ये एडिटिव्स धूल-धुएं को दबा देते हैं। इससे पार्टिकुलेट मैटर का उत्सर्जन 30% कम करते हैं और सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड्स भी कम छोड़ते हैं।

ग्रीन पटाखों की प्रमाणन प्रक्रिया में सख्ती। - फोटो : अमर उजाला

ग्रीन पटाखों की खरीद और बिक्री से जुड़े नियम क्या? 

ग्रीन पटाखों की खरीद और बिक्री को लेकर अदालत और नियामक प्राधिकरणों की ओर से कई सख्त नियम तय किए गए हैं...

1. निर्माताओं-बेचने वालों के लिए 
  • ग्रीन पटाखों की बिक्री केवल अधिकृत दुकानों और संबंधित जिला प्रशासन द्वारा तय किए गए विशिष्ट बाजारों/स्थानों से ही की जा सकती है। 
  • ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म या वेबसाइट्स के माध्यम से पटाखों की ऑनलाइन बिक्री और डिलीवरी पर पूरी तरह रोक है। 
  • वेबसाइट्स पर कीमतों की सूची होने का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि उन्हें ऑनलाइन ऑर्डर करना कानूनी रूप से मान्य है।
  • दिल्ली-एनसीआर में अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे सभी निर्माताओं और व्यापारियों से अनिवार्य रूप से सुरक्षा राशि जमा करवाएं। 
  • अगर निर्माता/विक्रेता अदालत के आदेशों या नियमों का उल्लंघन करते हैं तो यह जमानत राशि जब्त करने का प्रावधान रखा गया है।
  • किसी निर्माता की ओर से बनाए गए ग्रीन पटाखे नकली पाए जाते हैं या वे तय मानकों का उल्लंघन करते हैं, तो निर्माता का लाइसेंस तुरंत रद्द करने का प्रावधान है।

ग्रीन पटाखों की पैकेजिंग में पहचान बताना अनिवार्य। - फोटो : अमर उजाला
2. उपभोक्ताओं के लिए क्या हैं नियम
दिल्ली-एनसीआर में बाहर से पटाखे खरीदने और लाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। इतना ही नहीं दिल्ली-एनसीआर में उपभोक्ताओं को खरीदारी करते समय अपने जिले या प्रशासन की ओर से जारी बिक्री की निर्धारित तारीखें और स्वीकृत उत्पाद का पालन करना अनिवार्य है।


और पढ़ें...
विज्ञापन
विज्ञापन
Next