उत्तर प्रदेश में करीब 5000 कोल्हू के जरिए होने वाले चीनी व अन्य उत्पादन पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) से अंतरिम आदेश के तहत प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। इसके अलावा याची ने एनजीटी से कोल्हू के जरिए होने वाले पर्यावरण प्रदूषण की जांच भी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व उत्तर प्रदेश के संबंधित प्राधिकरण से कराने की मांग की है।
वहीं एनजीटी ने इस मामले पर केंद्र व राज्य के संबंधित प्राधिकरणों से जवाब मांगा है। हालांकि याची की ओर से कोल्हू के जरिए होने वाले प्रदूषण पर किसी तरह का अध्ययन न पेश कर पाने पर पीठ ने कहा है कि वे कोल्हू से होने वाले प्रदूषण को लेकर अभी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचेंगे। अगली सुनवाई में मामले पर और दलीलें सुनी जाएंगी। अगली सुनवाई 22 दिसंबर को होगी।
जस्टिस यूडी साल्वी की अध्यक्षता वाली पीठ याची अनिल कुमार के मामले पर सुनवाई कर रही है। याची की ओर से पेश एडवोकेट निशांत गौतम ने अपनी दलीलें पेश कीं। एडवोकेट गौतम ने कहा कि समूचे उत्तर प्रदेश में चीनी उत्पादन के लिए मिलों के संबंध में कड़े पर्यावरणीय कानून हैं जबकि कोल्हू के जरिए चीनी उत्पादन के लिए न तो किसी तरह की गाइडलाइन है और न ही कोई कानून।
यदि चीनी उत्पादन का अनुपात देखा जाए तो 50 फीसदी चीनी यदि मिलों के जरिए होती है तो 50 फीसदी कोल्हू के जरिए उत्पादित होती है। कोल्हू के जरिए गन्ने की पेराई से चीनी व अन्य उत्पाद तैयार करने का काम प्रमुख तौर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश और मध्य उत्तर प्रदेश में किया जा रहा है।