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दुकानों पर सेना की वर्दी बिकने पर रक्षा मंत्रालय से जवाब-तलब

Tue, 06 Dec 2016 11:55 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
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हाईकोर्ट ने आतंकवादियों द्वारा सेना की वर्दी पहनकर हमलों को अंजाम देने पर गहरी चिंता जताई है। अदालत ने निजी दुकानों पर सेना की वर्दी व अन्य सामानों की बिक्री पर रोक लगाने के संबंध में दायर याचिका पर रक्षा मंत्रालय से जवाब तलब किया है।
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मुख्य न्यायाधीश जी. रोहिणी और न्यायमूर्ति जयंत नाथ की खंडपीठ ने दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि यह काफी गंभीर मामला है। इसी वजह से हम इस पर तुरंत सुनवाई कर रहे हैं। अदालत ने रक्षा मंत्रालय को निर्देश दिया कि इस मुद्दे पर उसकी क्या राय है, इस पर विस्तृत जवाब दाखिल करे।

मामले की अगली सुनवाई 3 फरवरी को होगी। याची ने अदालत को बताया कि जनवरी में पठानकोट एयरफोर्स बेस पर भारतीय सेना की वर्दी पहने आतंकवादियों ने हमला किया गया था। इस हमले में एक लेफ्टिनेंट कर्नल सहित सात सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए और एक नागरिक की भी मौत हो गई थी।
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इसी प्रकार पिछले महीने पुलिस की वर्दी पहने आतंकवादियों ने जम्मू जिले के नगरोटा में सेना के 16वीं कोर के मुख्यालय पर हमला किया था। इस हमले में दो अधिकारियों सहित सात सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए थे।
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मंत्रालय ने कोई कार्रवाई नहीं की है

याची एनजीओ मानव अधिकारों की रक्षा के अधिवक्ता केआर चित्रा ने खंडपीठ को बताया कि उन्होंने पहले भी इसी मुद्दे को लेकर याचिका दायर की थी। अदालत ने 20 जुलाई को रक्षा मंत्रालय को इसे ज्ञापन के रूप में स्वीकार कर उठाए गए मुद्दों पर विचार करने का निर्देश दिया था।

उन्होंने कहा कि मंत्रालय ने तीन माह बीतने के बावजूद कुछ नहीं किया, तो फिर ज्ञापन दिया, लेकिन तब भी मंत्रालय ने कोई कार्यवाही नहीं की। इससे आतंकी अभी भी निजी दुकानों से सेना व पुलिस की वर्दी खरीदकर घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं।

उन्होंने कहा कि 6 जनवरी 2016 को भारतीय सेना ने अधिसूचना जारी कर कहा है कि सेना की वर्दी को खरीदने व बेचने पर प्रतिबंध है। बावजूद इसके निजी दुकानों पर सेना व पुलिस की वर्दी की बिक्री जारी है। इस पर रोक का आदेश जारी किया जाए।
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