नंदीग्राम में रैली के दौरान अभिषेक बनर्जी
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करीब दो साल पहले पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने जबरदस्त जीत हासिल की थी। हालांकि टीएमसी की मुखिया ममता बनर्जी को नंदीग्राम में अपने पुराने सहयोगी सुवेंदु अधिकारी के सामने हार का सामना करना पड़ा था। ममता बनर्जी की इस हार ने टीएमसी की जीत को कुछ फीका कर दिया था। यही वजह है कि टीएमसी अब नंदीग्राम के किले में सेंध लगाने की तैयारियों में जुटी है।
'50 हजार से ज्यादा वोटों से जीतेगा टीएमसी उम्मीदवार'
बता दें कि आगामी पंचायत चुनाव और अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव को देखते हुए नंदीग्राम में अपनी पकड़ को मजबूत करने के लिए टीएमसी सांसद और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने नंदीग्राम में 20 किलोमीटर लंबी रैली निकाली। इस रैली को पार्टी ने नबो जोवार (नई लहर) नाम दिया है। अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव के दौरान धांधली से सुवेंदु अधिकारी जीते थे। उन्होंने कहा कि '2021 बंगाल विधानसभा के चुनाव नंदीग्राम में फर्जी थे। इस धरती के लोग ये जानते हैं कि क्या हुआ था। अगले चुनाव में टीएमसी उम्मीदवार 50 हजार से ज्यादा वोटों से जीतेगा।'
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भाजपा भी कड़ी टक्कर देने की तैयारी में
जहां एक तरह टीएमसी सुवेंदु अधिकारी के गढ़ नंदीग्राम में रैली कर रही है। वहीं सुवेंदु अधिकारी भी झारग्राम जिले के गढ़ सलबोनी पहुंचे थे। बता दें कि यहीं पर अभिषेक बनर्जी के काफिले पर बीते दिनों पथराव हुआ था। जिसके चलते कई लोगों को हिरासत में लिया गया है। हिरासत में लिए गए लोगों के परिजनों से मिलने सुवेंदु अधिकारी पहुंचे थे।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि 'सीपीएम की सरकार ने भी यही किया था और अब टीएमसी की सरकार भी बिना ट्रायल के लोगों को हिरासत में ले रही है। मैंने तब भी इसे रोका था और अब भी इसे रोकूंगा।' अधिकारी ने कहा कि 'गरीब लोगों को प्रताड़ित किया जा रहा है। यह नहीं चल सकता। कुर्मी और जनजातीय लोगों में मतभेद पैदा किए जा रहे हैं।' पीड़ित परिवारों को सुवेंदु अधिकारी ने हरसंभव मदद करने की बात कही।
लोकसभा चुनाव अहम
बता दें कि आगामी लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में कड़ी टक्कर देखने को मिल सकती है। दरअसल 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने बंगाल की 42 लोकसभा सीटों में से 18 पर जीत दर्ज की थी। अब जब तीसरे मोर्चे की चर्चा चल रही है तो ममता बनर्जी की कोशिश है कि वह राज्य में ज्यादा से ज्यादा लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज करें ताकि उनका दावा मजबूत हो सके। यही वजह है कि आगामी लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए टीएमसी और भाजपा दोनों ही पार्टियां अपनी-अपनी किलेबंदी में जुटी हुई हैं।