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West Bengal: बंगाल में SIR ड्यूटी बैंक अधिकारियों के लिए जी का जंजाल, असुरक्षित माहौल में सुरक्षा देने की मांग

Fri, 16 Jan 2026 02:59 PM IST
कुमार विवेक डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अखिल भारतीय बैंक अधिकारी परिसंघ (एआईबीओसी) ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान अपने सदस्यों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। फरक्का में हुई एक घटना का हवाला देते हुए परिसंघ ने कहा, एसआईआर प्रक्रिया के सूक्ष्म पर्यवेक्षक के रूप में तैनात बैंक अधिकारियों पर कथित तौर पर असामाजिक तत्वों ने हमला किया है।
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पश्चिम बंगाल में एसआईआर - फोटो : डीडी न्यूज
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विस्तार
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3.25 लाख सदस्यों का प्रतिनिधित्व करने वाले बैंकिंग क्षेत्र के सबसे बड़े ट्रेड यूनियन संगठन 'अखिल भारतीय बैंक अधिकारी परिसंघ' (एआईबीओसी) ने पश्चिम बंगाल में एसआईआर ड्यूटी को लेकर चिंता जताई है। 'एसआईआर' ड्यूटी, बैंक अधिकारियों के लिए 'जी का जंजाल' बन गई है। एआईबीओसी ने तनावपूर्ण/असुरक्षित माहौल में बैंक अधिकारियों को पर्याप्त सुरक्षा देने की मांग की है। पश्चिम बंगाल में 26 दिसंबर 2025 से 14 फरवरी 2026 तक, लगभग डेढ़ महीने की अवधि के लिए, बैंक अधिकारियों को मतदाता सूची सूक्ष्म पर्यवेक्षक (ईआरएमओ) के रूप में तैनात किया गया है। परिसंघ ने इस मामले में भारतीय निर्वाचन आयोग, राज्य निर्वाचन अधिकारियों और वित्तीय सेवा विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। 

बैंक अधिकारियों को सुरक्षा प्रदान की जाए

अखिल भारतीय बैंक अधिकारी परिसंघ (एआईबीओसी) के महासचिव रूपम रॉय ने अपने बयान में यह बात कही है। परिसंघ ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान अपने सदस्यों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। फरक्का में हुई एक घटना का हवाला देते हुए रॉय ने कहा, एसआईआर प्रक्रिया के सूक्ष्म पर्यवेक्षक के रूप में तैनात बैंक अधिकारियों पर कथित तौर पर असामाजिक तत्वों ने हमला किया है। इसमें कुछ अधिकारी घायल हो गए हैं। यह घटना संकेत देती है कि तनावपूर्ण एवं असुरक्षित माहौल में बिना पर्याप्त सुरक्षा के ड्यूटी कर रहे बैंक अधिकारी व्यक्तिगत जोखिम का सामना कर रहे हैं। एआईबीओसी ने आरोप लगाया है कि घटना स्थल पर पुलिस मौजूद नहीं थी। 

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एसआईआर ड्यूटी पर प्रतिनियुक्त अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी निर्वाचन आयोग की है। यह तैनाती, तिमाही और वर्ष के अंत के सबसे महत्वपूर्ण बैंकिंग समय के साथ मेल खाती है। एआईबीओसी को आशंका है कि अधिकारियों का इस प्रकार लंबे समय तक मुख्य बैंकिंग कार्यों से अलग होना, आंतरिक और बाह्य नियामक अनुपालन, लेखा समापन, लेखापरीक्षा संबंधी कार्य और वैधानिक/व्यावसायिक लक्ष्यों की प्राप्ति में बाधा उत्पन्न करेगा। एसआईआर ड्यूटी के चलते से ग्राहक सेवा और परिचालन परिणामों पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। इसका अन्य सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन पर भी गंभीर असर पड़ेगा। 

हालांकि बैंक अधिकारियों ने राष्ट्रीय हित में वैध सार्वजनिक कर्तव्यों का निरंतर पालन किया है, लेकिन इस तरह  की तैनाती का पैमाना, समय और लंबी अवधि अब आवश्यक बैंकिंग कार्यों को काफी हद तक बाधित कर रहा है। बैंक अधिकारियों को अनावश्यक परिचालन, अनुपालन और सेवा जोखिमों की तरफ ले जाया जा रहा है। इससे अधिकारियों के व्यक्तिगत जीवन में भी काफी व्यवधान उत्पन्न होता है। इतना ही नहीं, एसआईआर ड्यूटी से कार्य की निरंतरता, प्रशिक्षण संबंधी दायित्व और वैध कैरियर प्रगति प्रभावित होती है।
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पश्चिम बंगाल में कई अधिकारियों को कोलकाता में प्रशिक्षण देने के बाद उन्हें 750-800 किमी दूर तैनात कर दिया गया। इस तरह की यात्रा करने के लिए मजबूर किए जाने के तरीके पर एआईबीओसी ने कड़ी आपत्ति जताई है। यह यात्रा ज्यादातर उनके अपने खर्च पर होती है। राज्य चुनाव अधिकारियों से अपर्याप्त रसद मिलती है। एआईबीओसी इस बात से भी चिंतित है कि तैनाती निर्देशों में बीमा कवरेज, स्पष्ट चिकित्सा/पारिवारिक आपातकालीन छुट्टी प्रोटोकॉल या स्पष्ट प्रतिपूर्ति व्यवस्था का कोई प्रावधान नहीं है। इसके चलते अधिकारियों को अनावश्यक व्यक्तिगत और व्यावसायिक जोखिमों का सामना करना पड़ता है। 

बैंक अधिकारियों के परिसंघ की चिंता बढ़ी

फरक्का में सूक्ष्म पर्यवेक्षकों पर हुए अकारण हमले ने बैंक अधिकारियों के परिसंघ की चिंता बढ़ा दी है। वहां बदमाशों का एक समूह, बिना किसी रोक-टोक के संबंधित ईआरओ के कार्यालय में घुस गया। कार्यालय में तोड़फोड़ की और दो सूक्ष्म पर्यवेक्षकों को शारीरिक चोटें पहुंचाईं। चिंताजनक रूप से, वहां कोई पुलिस सुरक्षा नहीं थी। सूक्ष्म पर्यवेक्षकों को उपद्रवी भीड़ के भरोसे छोड़ दिया गया था। उन्हें खुद ही अपनी रक्षा करनी पड़ी। यह घटना एक उदाहरण मात्र है। इस तरह की और भी घटनाएं होने की आशंका है। इस नाजुक स्थिति के बावजूद, महिला अधिकारियों सहित अतिरिक्त अधिकारियों को सूक्ष्म पर्यवेक्षकों के रूप में नए सिरे से तैनात किया जा रहा है, जो चिंता की गंभीरता को और बढ़ा देता है।

एआईबीओसी के मुताबिक, पश्चिम बंगाल एकमात्र ऐसा राज्य दिखाई पड़ता है, जहां सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) के अधिकारियों को एसआईआर प्रक्रिया में शामिल किया जा रहा है। निजी क्षेत्र के बैंकों के कर्मचारियों को इस तरह की नियुक्तियों से दूर रखा जा रहा है। यह पीएसबी और उनके कर्मचारियों के प्रति एक अनुचित और भेदभावपूर्ण दृष्टिकोण को दर्शाता है।

एआईबीओसी नीति निर्माताओं का ध्यान एक मूलभूत प्रश्न की ओर आकर्षित करना चाहता है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को प्रदर्शन मानकों पर निजी समकक्षों के साथ नियमित रूप से क्यों तुलना की जाती है, जबकि साथ ही साथ उन्हें व्यापक सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन का कार्य सौंपा जाता है। बार-बार विभिन्न सरकारी पहलों और प्रशासनिक कार्यों के लिए नियुक्त किया जाता है। एआईबीओसी की मांग है कि इस तरह की गैर-बैंकिंग गतिविधियों को व्यावसायिक मापदंडों में उचित रूप से शामिल किया जाए। 

मुद्रीकरण के माध्यम से या प्रमुख बेंचमार्क के उचित समायोजन के माध्यम से, ताकि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और उनके कर्मचारियों का अनुचित मूल्यांकन या दंड न हो। एआईबीओसी, संबंधित अधिकारियों का ध्यान इस ओर आकर्षित करना चाहता है कि बैंक अधिकारियों को गैर-बैंकिंग कार्यों में तैनात करने की यह प्रथा बंद की जाए। 

एआईबीओसी ने इस मामले में उच्चतम स्तर पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है, जिसमें वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) को मामला सौंपना भी शामिल है, ताकि महत्वपूर्ण तिमाही/वर्ष के अंत की अवधि के दौरान बैंक अधिकारियों की इस तरह की लंबी गैर-बैंकिंग तैनाती को रोका जा सके। यह चुनाव संबंधी भर्ती, दिशानिर्देशों के अनुरूप होनी चाहिए, जिनमें रोस्टर-आधारित चयन, आवश्यक श्रेणियों के लिए छूट और केवल न्यूनतम आवश्यक सीमा तक ही भर्ती पर जोर दिया गया है। यह देखा जाए कि महत्वपूर्ण सार्वजनिक सेवाओं पर इसका प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। 

बैंकिंग संचालन विशिष्ट, समयबद्ध और अनुपालन-महत्वपूर्ण होते हैं और प्रणालीगत परिणामों के बिना इन्हें लापरवाही से बाधित नहीं किया जा सकता है। चुनाव आयोग के निर्देश, जिनमें न्यूनतम भर्ती पर जोर दिया गया है और यह कि बैंकों/एलआईसी को केवल न्यूनतम संभव सीमा तक ही भर्ती करनी चाहिए, का अक्षरशः और भावना से संज्ञान लिया जाना चाहिए। एआईबीओसी बैंक अधिकारी राष्ट्रीय हित में वैध सार्वजनिक कर्तव्यों के साथ सहयोग करना जारी रखेंगे, लेकिन ऐसा सहयोग व्यक्तिगत सुरक्षा, असमान व्यवहार और मुख्य बैंकिंग और अनुपालन कार्यों के अनावश्यक अवरोध की कीमत पर नहीं हो सकता। एआईबीओसी इस मामले को सभी उपयुक्त स्तरों पर तब तक आगे बढ़ाएगा, जब तक कि इन तैनाती को तर्कसंगत नहीं बना दिया जाता। नीति और कार्यान्वयन, दोनों में पर्याप्त सुरक्षा उपाय सुनिश्चित नहीं हो जाते।

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