पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की तैयारी कर रहा है। राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने निर्वाचन आयोग के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अब प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा के वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी ने ममता को चुनौती दी है कि वे अपने आरोपों को साबित करने के लिए 13 अक्तूबर तक सबूत पेश करें। ऐसा करने में विफल रहने पर मुख्यमंत्री के आरोपों को झूठा माना जाएगा।
सीएम ममता के आरोपों को लेकर शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को कहा, राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) मनोज अग्रवाल के खिलाफ लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों के सबूत अगर 13 अक्तूबर तक पेश नहीं किए जाते हैं तो सीएम के तमाम आरोप झूठे माने जाएंगे। अधिकारी ने कहा कि यदि ममता बनर्जी के पास किसी भी प्रकार के दस्तावेजी प्रमाण हैं, तो उन्हें सोमवार शाम 5 बजे तक सार्वजनिक करना चाहिए।
भाजपा नेता ने बंगाल में सत्ताधारी दल- टीएमसी की अध्यक्ष ममता बनर्जी पर विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) की प्रक्रिया से डरने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा, मुख्यमंत्री चुनाव आयोग (EC) के अधिकारियों को धमकाने की कोशिश कर रही हैं। भाजपा का आरोप है कि बंगाल की मतदाता सूची में बड़ी संख्या में फर्जी मतदाता हैं जो तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के समर्थक हैं, और SIR के दौरान उनके नाम हटने की संभावना से सत्तारूढ़ दल चिंतित है।
शुभेंदु अधिकारी ने एसआईआर पर जारी आरोप-प्रत्यारोप के बीच पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय जाकर एक ज्ञापन भी सौंपा। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में चुनाव पंजीकरण अधिकारियों (Electoral Registration Officers - EROs) की नियुक्ति में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। बकौल शुभेंदु अधिकारी, कई जिलाधिकारियों ने राज्य के वरिष्ठ सिविल सेवा अधिकारियों को दरकिनार कर जूनियर अफसरों को ERO बनाया है। ये चुनाव आयोग के दिशानिर्देशों का उल्लंघन है। भाजपा नेता ने कहा कि इस तरह की 226 नियुक्तियां अवैध हैं। उन्होंने इसे मतदान प्रक्रिया की निष्पक्षता को कमजोर करने वाला कदम बताया।
भाजपा नेता ने कहा, बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) मनोज अग्रवाल और उनके कई अधिकारी राज्य सरकार के विभिन्न पदों पर काम कर चुके हैं। उन्होंने कहा, अगर सरकार के पास उनके खिलाफ अनियमितता के प्रमाण हैं तो सीएम ममता बनर्जी को भी इसकी जानकारी होगी। हालांकि, उन्होंने उस पर कार्रवाई नहीं की।
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भाजपा नेता अधिकारी के बयान पर पलटवार करते हुए तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के प्रवक्ता अरूप चक्रवर्ती ने कहा, भाजपा नेता चुनाव आयोग के उन अधिकारियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं जो कथित रूप से वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, जब भी चुनाव नजदीक आते हैं, भाजपा नेताओं को ऐसे अफसरों की याद आती है, जिन्हें केंद्र की भाजपा सरकार ने चुना है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि भाजपा जानती है, अगर निष्पक्ष चुनाव कराए जाएं तो वह जीत नहीं सकती।
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सीएम ममता ने क्या आरोप लगाए हैं?
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बृहस्पतिवार को इशारों-इशारों में कहा था कि SIR प्रक्रिया की निगरानी करने वाले एक निर्वाचन अधिकारी पर भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे हैं। उन्होंने कहा कि निर्वाचन अधिकारी बंगाल में 'भ्रष्ट अधिकारियों की नियुक्ति' कर रहे हैं और उनके पास साजिश के सबूत भी हैं। बकौल ममता बनर्जी, 'SIR के बहाने वैध मतदाताओं के वोट काटे जा रहे हैं। हालांकि, मुझे उम्मीद है कि वे देश और लोकतंत्र के साथ विश्वासघात नहीं करेंगे।'