नंदीग्राम उपचुनाव से पहले ममता बनर्जी और अखिल गिरि की बातचीत ने टीएमसी के संभावित उम्मीदवार को लेकर चर्चा बढ़ा दी है। गिरि ने स्थानीय उम्मीदवार को प्राथमिकता देने की बात कही है, लेकिन उनका नाम अभी तय नहीं है। नंदीग्राम कभी टीएमसी के सत्ता में आने की कहानी का केंद्र था, लेकिन अब पार्टी के लिए वापसी की परीक्षा बन गया है। छह अक्तूबर का चुनाव शुभेंदु अधिकारी और टीएमसी, दोनों के लिए अहम माना जा रहा है।
नंदीग्राम उपचुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस में हलचल बढ़ गई है। पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने वरिष्ठ नेता अखिल गिरि से फोन पर बात की है। इसके बाद उन्हें शनिवार को अपने कालीघाट स्थित घर पर भी बुलाया। इससे चर्चा तेज हो गई है कि टीएमसी नंदीग्राम से अखिल गिरि को मैदान में उतारने पर विचार कर रही है। हालांकि, पार्टी ने अभी उनके नाम का एलान नहीं किया है। अखिल गिरि ने भी इसकी पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी ने उनसे उपचुनाव को लेकर राय मांगी थी। उन्होंने अपने सुझाव दिए हैं। गिरि ने ये सुझाव पार्टी को वाट्सएप पर भी भेजे हैं।
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अखिल गिरि ने क्या कहा?
अखिल गिरि ने खुद को पार्टी का वफादार सिपाही बताया। उन्होंने कहा कि पार्टी उन्हें जो भी जिम्मेदारी देगी, वह उसे निभाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि नंदीग्राम में स्थानीय उम्मीदवार को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। हालांकि, अंतिम फैसला ममता बनर्जी ही लेंगी। इससे यह संकेत जरूर मिल रहा है कि टीएमसी स्थानीय चेहरे पर दांव लगाने के विकल्प पर विचार कर रही है। लेकिन अभी अखिल गिरि को उम्मीदवार मानना जल्दबाजी होगी।
नंदीग्राम टीएमसी के लिए इतना अहम क्यों?
नंदीग्राम का टीएमसी की राजनीति में खास महत्व है। 2007 में यहां जमीन अधिग्रहण के खिलाफ बड़ा आंदोलन हुआ था। इस आंदोलन ने ममता बनर्जी और टीएमसी को मजबूत किया। 2011 में पार्टी सत्ता में आई। बंगाल में 34 साल का वाम मोर्चे का शासन खत्म हुआ। लेकिन 2021 में यही नंदीग्राम ममता के लिए बड़ा झटका बन गया। उन्होंने अपने पुराने सहयोगी शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ यहां से चुनाव लड़ा था। अधिकारी तब भाजपा में जा चुके थे। उन्होंने ममता को हरा दिया।
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अब नंदीग्राम में उपचुनाव क्यों हो रहा है?
2026 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से चुनाव जीता। बाद में उन्होंने भवानीपुर सीट अपने पास रखी। नंदीग्राम से इस्तीफा दे दिया। इसलिए यहां छह अक्तूबर को उपचुनाव होना है। टीएमसी के लिए यह चुनाव काफी अहम है। पार्टी मई में सत्ता से बाहर हो चुकी है। ऐसे में नंदीग्राम का नतीजा उसके लिए वापसी की कोशिश का शुरुआती संकेत होगा।
टीएमसी के सामने एक और बड़ी मुश्किल क्या है?
पार्टी के सामने संगठन का संकट भी है। टीएमसी के नाम और घास पर दो फूल वाले चुनाव चिह्न को लेकर चुनाव आयोग में विवाद चल रहा है। ममता बनर्जी का खेमा और ऋतब्रत बनर्जी की अगुआई वाला बागी गुट आमने-सामने है। दोनों पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न और फंड पर दावा कर रहे हैं। शनिवार को चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों से बातचीत की। फैसला अभी नहीं आया है।
क्या ममता खुद नंदीग्राम लौटेंगी?
टीएमसी के पुराने नंदीग्राम नेटवर्क से भी ममता के खुद चुनाव लड़ने की मांग उठी है। वरिष्ठ नेता अबू ताहेर ने कहा है कि ममता को नंदीग्राम आकर चुनाव लड़ना चाहिए। ताहेर 2007 के जमीन अधिग्रहण विरोधी आंदोलन के प्रमुख चेहरों में रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर पार्टी उनसे चुनाव लड़ने को कहती है तो वह मना कर देंगे। उनका कहना है कि पार्टी के सत्ता में रहने के दौरान भी उन्हें उम्मीदवार चुनते समय नजरअंदाज किया गया।
उधर, भाजपा ने सीएम शुभेंदु अधिकारी को नंदीग्राम वाले तमलुक जिले की संगठनात्मक जिम्मेदारी दी है। ऐसे में छह अक्तूबर का चुनाव सिर्फ एक सीट का मुकाबला नहीं है। यह टीएमसी और भाजपा के लिए नंदीग्राम में अपनी ताकत दिखाने की भी परीक्षा है।