तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मची बड़ी राजनीतिक हलचल के बीच सांसद महुआ मोइत्रा ने बागी विधायकों पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने गुरुवार को इन विधायकों पर मतदाताओं के साथ विश्वासघात करने और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ हाथ मिलाने का आरोप लगाया।
क्या है मामला?
यह विवाद तब बढ़ा जब बुधवार को TMC के 80 नए विधायकों में से 58 विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष रथींद्रनाथ बोस के कक्ष तक मार्च किया। इस बागी गुट का नेतृत्व हाल ही में पार्टी से निकाले गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपान साहा कर रहे हैं। इन बागियों का दावा है कि उनके पास दलबदल विरोधी कानून से बचने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत है। उन्होंने आधिकारिक तौर पर TMC विधायक दल पर अपना दावा पेश किया है और ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता घोषित कर दिया है।
महुआ मोइत्रा ने दावों पर जताई कड़ी आपत्ति
महुआ मोइत्रा ने इन विधायकों के दावों पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इन सभी विधायकों ने अपनी जीत केवल ममता बनर्जी के नाम और उनके नेतृत्व की वजह से हासिल की है। मोइत्रा के अनुसार, इन विधायकों को जो वोट मिले, वे पूरी तरह से भाजपा विरोधी थे। उन्होंने बताया कि TMC ने ममता बनर्जी के चेहरे और पार्टी के चुनाव चिह्न पर 41 प्रतिशत वोट हासिल किए थे।
सांसद ने बागी विधायकों को खुली चुनौती देते हुए कहा कि वे खुद को आजाद नहीं कह सकते। उन्होंने कहा कि अगर उनमें हिम्मत है, तो वे अपनी सीटों से इस्तीफा दें और नए सिरे से चुनाव लड़ें। उन्होंने मजाक उड़ाते हुए कहा कि बागियों को अब बिजेमूल नाम के चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ना चाहिए। मोइत्रा ने कहा कि ये लोग भाजपा विरोधी वोटों से जीते थे, लेकिन अब भाजपा का ही साथ दे रहे हैं।
चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए
मोइत्रा ने चुनाव आयोग की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आयोग को भाजपा का मोहरा बताया। उन्होंने चुनाव के दौरान केंद्रीय बलों के व्यवहार और मतदाता सूची से लोगों के नाम हटाए जाने की भी कड़ी आलोचना की।
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ममता बनर्जी के नेतृत्व पर जताया भरोसा
पार्टी में मचे इस घमासान को मोइत्रा ने शुद्धिकरण का एक अच्छा अवसर बताया। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी ने शून्य से शुरुआत की थी और भाजपा के खिलाफ लड़ाई में डर की कोई जगह नहीं है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जो लोग पार्टी छोड़ना चाहते हैं, उनके लिए दरवाजे पूरी तरह खुले हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं को भरोसा दिलाया कि यह पार्टी ममता बनर्जी के नेतृत्व में ही चलेगी।
फिलहाल पश्चिम बंगाल की राजनीति में काफी अनिश्चितता बनी हुई है। बागी गुट के अलग होने से विधानसभा में सीटों का समीकरण पूरी तरह बदल गया है। जहां बागी विधायक कानूनी सुरक्षा का दावा कर रहे हैं, वहीं TMC नेतृत्व इसे जनता के जनादेश के साथ वैचारिक विश्वासघात बता रहा है।