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West Bengal Politics: चुनाव आयोग पर CM ममता के गंभीर आरोप, कहा- 20 वर्षों के वैधानिक सुधार की अनदेखी कर रहा EC

Mon, 12 Jan 2026 03:00 PM IST
अमन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता।

सार

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त को नया पत्र लिखा है। उन्होंने निर्वाचन आयोग पर सुधारों की अनदेखी करने के आरोप लगाए हैं। सीएम ममता ने कहा कि आयोग के रूख के कारण मतदाताओं को अपनी पहचान दोबारा सिद्ध करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
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सीएम ममता बनर्जी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर एक बार फिर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा, 'आयोग अपने ही 20 वर्षों के वैधानिक सुधारों की अनदेखी कर रहा है, जिससे मतदाताओं को अपनी पहचान दोबारा स्थापित करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।' बता दें कि मुख्यमंत्री ने इससे पहले भी एक अन्य पत्र में निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के समक्ष कई गंभीर मुद्दे उठाए थे।
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चुनाव आयुक्त को लिखा पांचवां पत्र
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को सोमवार को एक और पत्र लिखा है। यह उनका पांचवां पत्र है। इसमें उन्होंने वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (एसआईआर) प्रक्रिया में हो रही गड़बड़ियों पर चिंता जताई है।

ये भी पढ़ें: CM ममता ने CEC को लिखा पत्र: कहा- SIR से लोकतांत्रिक ढांचे पर चोट, मामूली गलतियों पर परेशान किए जा रहे मतदाता
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क्या बोलीं सीएम ममता बनर्जी?
ममता बनर्जी का दावा है कि 2002 की वोटर लिस्ट को डिजिटल बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल किया गया, जिससे गंभीर गलतियां हुई हैं। उनका कहना है कि इन तकनीकी खामियों की वजह से असली वोटरों को गलत तरीके से 'विसंगति' वाली श्रेणी में डाल दिया गया है। इससे आम लोगों को भारी परेशानी हो रही है।
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चुनाव आयोग पर आरोप
मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया कि वह अपनी ही पुरानी प्रक्रियाओं की अनदेखी कर रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले दो दशकों में जो सुधार हुए थे, उन्हें दरकिनार कर वोटरों को फिर से अपनी पहचान साबित करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने इसे मनमाना और संविधान की भावना के खिलाफ बताया।

सुनवाई प्रक्रिया पर सवाल
बनर्जी ने यह भी कहा कि एसआईआर के दौरान जमा किए गए दस्तावेजों की कोई रसीद नहीं दी जा रही है। उन्होंने सुनवाई प्रक्रिया को पूरी तरह मशीनी और संवेदनहीन बताया। उनका कहना है कि यह प्रक्रिया मानवीय संवेदनाओं से खाली है और लोकतंत्र की नींव को कमजोर कर रही है।

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