पश्चिम बंगाल में राज्य सरकार और राज्यपाल के बीच तनातनी लगातार जारी है। चुनावी हिंसा को लेकर पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी वी आनंद बोस ने बंगाल कई इलाकों का दौरा किया। वहीं अब पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी वी आनंद बोस ने राज्य निर्वाचन आयुक्त राजीव सिन्हा को एक सीलबंद लिफाफा भेजा है, जिसमें कुछ संवेदनशील दस्तावेज हैं।
एक अधिकारी ने बुधवार को बताया कि राजीव सिन्हा राजभवन में राज्यपाल से मिलने नहीं आए इसलिए उनको लिफाफा भेजा गया है। आगे उन्होंने बताया कि राजीव सिन्हा ने अपनी तरफ से तर्क दिया कि वह चुनाव कार्य में बहुत व्यस्त हैं इसलिए राज्यपाल से मिलने के लिए राजभवन नहीं जा पाएंगे।
अधिकारी ने पीटीआई को बताया कि राज्यपाल ने एसईसी को चुनावी हिंसा की हालिया घटनाओं पर चर्चा करने के लिए राजभवन आने के लिए कहा था। लेकिन राजीव सिन्हा ने यह कहते हुए उनसे मुलाकात नहीं की, कि वह चुनाव कार्य में व्यस्त हैं। इसके बाद राज्यपाल ने एक सीलबंद लिफाफा भेजा, जिसमें संवेदनशील दस्तावेज हैं हालांकि अधिकारी ने दस्तावेजों में क्या है इसके बारे में कोई जानकारी नहीं दी।
राज्यपाल ने किया हिंसा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा
राज्यपाल बोस ने सोमवार को बंगाल चुनाव आयुक्त सिन्हा को पंचायत चुनाव हिंसा पर लगाम लगाने के लिए 48 घंटे का समय दिया था। इसी के साथ राज्यपाल ने राज्य के उत्तरी भाग में दक्षिण 24 परगना जिले के कैनिंग, भांगर और बसंती और कूच बिहार जिले के दिनहाटा और सीताई में हिंसा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। यहां पिछले एक महीने में राज्य में चुनावी हिंसा में कई लोग मारे गए हैं और कई घायल हुए हैं।
आठ जुलाई को होना है चुनाव
पश्चिम बंगाल में एक ही चरण में आठ जुलाई को ग्रामीण इलाकों में मतदान होगा। तारीखों के एलान के बाद से ही राज्य में आचार सहिंता लागू हो गई थी। 15 जून को नामांकन का अंतिम दिन था। आठ जुलाई को हुए मतदान के नतीजा का एलान 11 जुलाई को किया जाएगा। जिला परिषद, पंचायत समिति और ग्राम पंचायत चुनाव में लगभग 74 हजार उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, जिनका फैसला राज्य के पांच करोड़ मतदाताओं के हाथों में है।
पिछले पंचायत चुनावों में भी हुई थी हिंसा कई लोग मारे गए थे
पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव के दौरान हिंसा का इतिहास रहा है। 2013 और 2018 के पंचायत चुनाव भी काफी हिंसा हुई थी। 2013 में जहां पंचायत चुनाव में हिंसा के चलते 39 लोगों की मौत हुई थी, वहीं 2018 में 21 लोग मारे गए थे। पिछले पंचायत चुनाव में 34 प्रतिशत सीटों पर टीएमसी निर्विरोध जीती थी, साथ ही 90 प्रतिशत सीटों पर टीएमसी समर्थित उम्मीदवारों ने ही जीत दर्ज की थी।