दूसरी ओर, एचएससीएल के प्रबंध निदेशक नीलेश शाह ने इस आरोप का खंडन करते हुए कहा है कि कंपनी ने अपनी गतिविधियों के विस्तार के लिए संपत्ति का अधिग्रहण किया है। दिल्ली में अपनी मुख्य कंपनी एनबीसीसी एवं ग्राहकों के साथ तालमेल बनाए रखने के लिए बेहतर आधारभूत ढांचा जरूरी है। वहीं एचएससीएल ठेका कर्मचारी एसोसिएशन ने आरोप लगाया है कि एचएससीएल को शिफ्ट करने के लिए एनबीसीसी इंडिया उसके नकदी भंडार का निकालने एवं धन के स्थानांतरण में जुटी है।
एसोसिएशन के महासचिव जयदीप लाहिड़ी ने यहां एक बयान में कहा है कि दिल्ली में एचएससीएल का क्षेत्रीय दफ्तर होने के बावजूद एनबीसीसी ने एचएससीएल के पैसों को अपने खाते में स्थानांतरित कर दिल्ली में दफ्तर के लिए एक जगह खरीदी है। वह जगह एनबीसीसी की ही है। यह बेतुका और समझौते का उल्लंघन है।
उल्लेखनीय है कि एनबीसीसी ने अप्रैल, 2017 में सहायक कंपनी के तौर पर एचएससीएल के 51 फीसदी शेयर लेकर उसका अधिग्रहण किया था। दिसंबर में इस्पात मंत्रालय ने एचएससीएल में अपने 49 फीसदी शेयर को आवासन एवं शहरी मामलों के मंत्रालय को देने का फैसला किया था।