बंगाल सरकार ने बिजली क्षेत्र में सुधार करने और वितरण प्रणाली को आधुनिक करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने अपने सभी कर्मचारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने निजी आवास में स्मार्ट मीटर लगाने में सहयोग करें।
West Bengal News: पश्चिम बंगाल सरकार ने बिजली क्षेत्र में बड़ा सुधार करने और वितरण प्रणाली को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने आदेश दिया है कि राज्य के सभी सरकारी कर्मचारी अपने निजी आवासों में स्मार्ट मीटर लगवाने में सहयोग करें। यह कदम राज्य की बिजली वितरण कंपनियों की आर्थिक स्थिति सुधारने और व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए उठाया गया है। यह पहल रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम का हिस्सा है।
विज्ञापन
मुख्य सचिव के कार्यालय की ओर से जारी आदेश के अनुसार यह प्रक्रिया उन सभी कर्मचारियों के लिए अनिवार्य है जिन्हें सरकारी खजाने से वेतन या मानदेय मिलता है। इसमें राज्य सरकार के विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों, निगमों और अन्य सरकारी संस्थानों के कर्मचारी शामिल हैं। सरकार ने जिलाधिकारियों और पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने कर्मचारियों को बिजली विभाग की इस प्रक्रिया में सहयोग करने के लिए कहें।
स्मार्ट मीटर लगाने के पीछे का लक्ष्य क्या?
राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य बिलिंग को सटीक बनाना है। स्मार्ट मीटर के जरिए बिजली की खपत का सही हिसाब रखा जा सकेगा और वितरण के दौरान होने वाले नुकसान को कम किया जा सकेगा। सरकार का मानना है कि इससे उपभोक्ताओं को मिलने वाली सेवाओं में सुधार होगा और बिजली विभाग की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।
विज्ञापन
पहले चरण में कितने केंद्रों पर होगा काम?
बंगाल सरकार के बिजली विभाग ने वर्तमान में राज्य के कुल 554 उपभोक्ता केंद्रों में से 103 पर स्मार्ट मीटर लगाने का काम शुरू किया है। पहले चरण में उन इलाकों को प्राथमिकता दी जा रही है जहां बिजली का घाटा सबसे ज्यादा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ये मीटर फिलहाल मौजूदा पोस्ट पेड बिलिंग सिस्टम के तहत ही काम करेंगे। उपभोक्ताओं को पहले की तरह ही बिल मिलेंगे। हालांकि बाद में उपभोक्ताओं के पास इस मीटर को प्री पेड करवाने का विकल्प भी मौजूद रहेगा।