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पश्चिम बंगाल चुनाव और समीकरण: युवाओं को साथ लाने में जुटा लेफ्ट, रोजगार को बनाया मुद्दा; समझिए कितना असरदार?

Sat, 21 Mar 2026 12:27 PM IST
Shubham Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता

सार

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की घड़ी नजदीक आ गई है और राजनीतिक रणभूमि गरमाई हुई है। आरोप-प्रत्यारोप भी सातवें आसमान पर पहुंच गया है। किस पार्टी की क्या नीति है? मुख्य फोकस कहां है? अभी सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है। ऐसे में अब सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाले लेफ्ट फ्रंट का भी बड़ा दांव सामने आया है। आइए जानते हैं।

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पश्चिम बंगाल चुनाव - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव में एक महीने का समय शेष रह गया है। इस बात को देखते हुए चुनावी रण में राजनीतिक पार्टियों ने अपनी-अपनी तैयारी तेज कर दी है, जिसके चलते आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति भी सातवें आसमान पर पहुंच गई है। सभी दल अपने-अपने मुद्दे पर दांव खेलने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में अब सीपीआई(एम)-नेतृत्व वाला लेफ्ट फ्रंट एक बार फिर युवाओं को लेकर अपना दांव खेलने की तैयारी कर रहा है। इसके तहत पार्टी नौकरी सृजन को अपनी प्रमुख नीति के तौर पर पेश कर रही है। 

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सीपीआई (एम) की तरफ से नौकरी सृजन नीति का मुख्य उद्देश्य युवाओं को फिर से पार्टी के साथ जोड़ना है, क्योंकि पिछले चुनावों में युवा मतदाता लेफ्ट से काफी दूर हो गए थे। इसके बारे में पार्टी के केंद्रीय समिति सदस्य सामिक लाहिरी ने बताया कि पार्टी ने इस बार कई युवा उम्मीदवार और युवा स्वयंसेवक मैदान में उतारे हैं। उनका मानना है कि युवा वर्ग की भागीदारी चुनाव में निर्णायक होगी।

सीपीआई (एम) का वैकल्पिक रोजगार नीति पर जोर
इतना ही नहीं लाहिरी ने इस बात पर भी जोर दिया कि राज्य में रोजगार की कमी है। लगभग 1.25 करोड़ लोग नौकरी न मिलने के कारण राज्य छोड़ चुके हैं। लेफ्ट फ्रंट ने राज्य के लिए एक वैकल्पिक रोजगार नीति तैयार की है, जिसे अपने चुनावी घोषणापत्र में जल्द ही जनता के सामने रखा जाएगा। लाहिरी ने बताया कि पार्टी का पूरा जोर इस चुनाव में नौकरी सृजन पर रहेगा।
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224 क्षेत्रों में उतारे उम्मीदवार
बता दें कि पार्टी के उम्मीदवार पहले ही चुनाव प्रचार में जुट गए हैं और स्थानीय स्तर पर घर-घर जाकर मतदाताओं से बातचीत कर रहे हैं। लेफ्ट फ्रंट ने अब तक 294 सीटों वाली विधानसभा में 224 क्षेत्रों के लिए उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। साथ ही, सीपीआई(एमएल)-लिबरेशन और इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) भी फ्रंट के सहयोगी के रूप में उम्मीदवार उतारेंगे।

रैलियों को लेकर क्या है पार्टी की योजना?
लाहिरी ने बताया कि पार्टी बड़ी रैलियों के बजाय छोटे स्थानीय बैठक और व्यक्तिगत बातचीत पर ज्यादा ध्यान दे रही है। इसके साथ ही पार्टी सोशल मीडिया का भी भरपूर इस्तेमाल कर रही है, ताकि जेन-जी तक आसानी से संदेश पहुंचाया जा सके। पार्टी के स्वयंसेवक बिना किसी भुगतान के यह काम कर रहे हैं और सभी सामग्री जैसे पोस्टर, स्लोगन, रील्स आदि अपने दम पर तैयार कर रहे हैं।

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इन समस्याओं पर सीपीआई (एम) का फोकस

इतना ही नहीं सीपीआई(एम) के केंद्रीय समिति सदस्य सुझन चक्रवर्ती ने कहा कि राज्य में शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सेवा और कानून-व्यवस्था जैसी समस्याएं गंभीर हैं। उनका कहना है कि तृणमूल कांग्रेस की सरकार के दौरान राज्य बुरी तरह प्रभावित हुआ है और इस चुनाव में लेफ्ट फ्रंट का मुख्य मुद्दा बंगाल को बचाना होगा।

ध्यान दिला दें कि लेफ्ट फ्रंट ने पिछले चुनावों में अपना समर्थन खो दिया था। 2011 में लेफ्ट फ्रंट को कुल वोट का 39% मिला था, जबकि 2021 में यह केवल 4.73% रह गया। 2024 के लोकसभा चुनाव में सीपीआई(एम) ने 5.73% वोट हासिल किया। पार्टी इस चुनाव में व्यक्तिगत संपर्क और मोहल्ला बैठक के माध्यम से मतदाताओं को वापस अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रही है। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव दो चरणों में होने हैं। पहला 23 अप्रैल और दूसरा 29 अप्रैल को। मतगणना 4 मई को होगी।

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