पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की घड़ी नजदीक आ गई है और राजनीतिक रणभूमि गरमाई हुई है। आरोप-प्रत्यारोप भी सातवें आसमान पर पहुंच गया है। किस पार्टी की क्या नीति है? मुख्य फोकस कहां है? अभी सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है। ऐसे में अब सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाले लेफ्ट फ्रंट का भी बड़ा दांव सामने आया है। आइए जानते हैं।
पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव में एक महीने का समय शेष रह गया है। इस बात को देखते हुए चुनावी रण में राजनीतिक पार्टियों ने अपनी-अपनी तैयारी तेज कर दी है, जिसके चलते आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति भी सातवें आसमान पर पहुंच गई है। सभी दल अपने-अपने मुद्दे पर दांव खेलने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में अब सीपीआई(एम)-नेतृत्व वाला लेफ्ट फ्रंट एक बार फिर युवाओं को लेकर अपना दांव खेलने की तैयारी कर रहा है। इसके तहत पार्टी नौकरी सृजन को अपनी प्रमुख नीति के तौर पर पेश कर रही है।
रैलियों को लेकर क्या है पार्टी की योजना?
लाहिरी ने बताया कि पार्टी बड़ी रैलियों के बजाय छोटे स्थानीय बैठक और व्यक्तिगत बातचीत पर ज्यादा ध्यान दे रही है। इसके साथ ही पार्टी सोशल मीडिया का भी भरपूर इस्तेमाल कर रही है, ताकि जेन-जी तक आसानी से संदेश पहुंचाया जा सके। पार्टी के स्वयंसेवक बिना किसी भुगतान के यह काम कर रहे हैं और सभी सामग्री जैसे पोस्टर, स्लोगन, रील्स आदि अपने दम पर तैयार कर रहे हैं।
ध्यान दिला दें कि लेफ्ट फ्रंट ने पिछले चुनावों में अपना समर्थन खो दिया था। 2011 में लेफ्ट फ्रंट को कुल वोट का 39% मिला था, जबकि 2021 में यह केवल 4.73% रह गया। 2024 के लोकसभा चुनाव में सीपीआई(एम) ने 5.73% वोट हासिल किया। पार्टी इस चुनाव में व्यक्तिगत संपर्क और मोहल्ला बैठक के माध्यम से मतदाताओं को वापस अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रही है। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव दो चरणों में होने हैं। पहला 23 अप्रैल और दूसरा 29 अप्रैल को। मतगणना 4 मई को होगी।