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Bengal: सीएम ममता के बदसलूकी वाले आरोपों को चुनाव आयोग ने किया खारिज, कहा- बिना सबूत के दावे बेबुनियाद

Wed, 06 May 2026 03:27 AM IST
अमन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता

सार

पश्चिम बंगाल के सीईओ ने ममता बनर्जी के ईवीएम धांधली और मारपीट के आरोपों को सबूतों के अभाव में खारिज कर दिया है। वहीं, ममता बनर्जी ने इस्तीफा देने से मना करते हुए चुनाव आयोग और भाजपा पर मिलीभगत का आरोप लगाया है। 
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मनोज कुमार अग्रवाल - फोटो : ANI
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विस्तार
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पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) मनोज कुमार अग्रवाल ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। ममता बनर्जी ने चुनाव नतीजों में धांधली और ईवीएम से छेड़छाड़ के गंभीर दावे किए थे। सीईओ ने कहा कि बिना किसी ठोस जानकारी के इन आरोपों की जांच नहीं हो सकती। उन्होंने सवाल किया कि कौन सी मशीन और किस टेबल पर गड़बड़ी हुई, जब तक यह स्पष्ट नहीं होगा, तब तक जवाब देना मुमकिन नहीं है।
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आरोपों पर क्या बोले सीईओ?
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया था कि मतगणना केंद्र पर उनके साथ धक्का-मुक्की और मारपीट हुई। इस पर सीईओ ने कहा कि सीसीटीवी कैमरे पूरे समय चालू थे और ऐसी कोई घटना नहीं हुई। उन्होंने बताया कि न तो मुख्यमंत्री और न ही उनकी टीम ने इस बारे में कोई औपचारिक शिकायत या एफआईआर दर्ज कराई है। अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि मतगणना में सीईओ की कोई सीधी भूमिका नहीं होती। यह काम जिला निर्वाचन अधिकारी की देखरेख में रिटर्निंग ऑफिसर करते हैं। उन्होंने फालटा में होने वाले दोबारा मतदान के लिए सुरक्षा का भरोसा दिया।

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हार मानने से किया इनकार
दूसरी ओर, ममता बनर्जी ने हार मानने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि वह इस्तीफा देने राजभवन नहीं जाएंगी क्योंकि वह चुनाव नहीं हारी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने भाजपा के साथ मिलकर 'खेल' खेला है। ममता ने मुख्य चुनाव आयुक्त को चुनाव का विलेन बताया और कहा कि भाजपा ने आयोग के जरिए उन्हें हराया है, लेकिन नैतिक रूप से जीत टीएमसी की हुई है।
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ममता ने ईवीएम की 80-90 प्रतिशत बैटरी चार्ज होने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव से पहले उनके कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया और अधिकारियों के तबादले किए गए। उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूची से 90 लाख नाम हटा दिए गए थे, जिनमें से कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद 32 लाख नाम वापस जोड़े गए। बता दें कि इस चुनाव में भाजपा ने 207 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया है, जबकि 15 साल से सत्ता में रही टीएमसी को केवल 80 सीटें मिली हैं।

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