दिल्ली में गुरुवार को राज्य और केंद्र के नेताओं के बीच उम्मीदवारों को लेकर देर रात तक मंथन हुआ। भाजपा त्रिकोणीय मुकाबले के लिए रणनीति तैयार कर रही है। तृणमूल के साथ सीधे के बजाय त्रिकोणीय मुकाबले में वोटों के बंटवारे में भाजपा अपने लिए लाभ देख रही है। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस-वामपंथी-आईएसएफ गठबंधन को भाजपा कमजोर नहीं मान रही है, बल्कि इसकी मजबूती को अपने लिए अच्छा मान रही है। पार्टी को उम्मीद है कि रविवार को प्रधानमंत्री मोदी की रैली के बाद माहौल उसके हक में बनना शुरू होगा। चुनावों में कड़ी टक्कर देने के लिए कई केंद्रीय मंत्री और सांसद भी मैदान में उतरने को तैयार हैं। हालांकि, राज्य इकाई ने अभी तक किसी सांसद या मंत्री को चुनाव मैदान में उतारने की सिफारिश नहीं की है। केंद्रीय नेतृत्व चाहे तो रणनीति के मुताबिक किसी सांसदों को टिकट दे सकता है।
मोदी लहर पर दांव खेलेगी भाजपा
बंगाल मे भाजपा के पास फिलहाल कोई मुख्यमंत्री पद का चेहरा नहीं है, ऐसे में पार्टी प्रधानमंत्री मोदी के चेहरे पर ही दांव खेलेगी। भाजपा भी नेतृत्व की तुलना में ममता बनर्जी सरकार के साथ केंद्र सरकार को रख रही है। इसके पीछे उसका तर्क है कि पार्टी राज्य में कभी सत्ता में नहीं रही है। ऐसे में वह केंद्र की उपलब्धियों और योजनाओं के साथ राज्य के लिए भविष्य की कार्ययोजना ही रख सकती है। साथ ही बता सकती है कि केंद्र के साथ राज्य में भी सरकार बनने पर किस तरह से डबल इंजन की सरकार काम करेगी।