बता दें कि साल 1913 में गीतांजलि के लिए रविंद्र नाथ टैगोर को साहित्य के नोबेल प्राइज पुरस्कार से नवाजा गया था। गीतांजलि मूल रूप में बंगाली में लिखी गई थी, जिसके अंग्रेजी अनुवाद को नोबेल प्राइज के लिए भेजा गया था। वहीं, सत्यजीत रे देश के जाने-माने निर्देशक थे। वह पहले भारतीय थे, जिन्हें लाइफ टाइम अचीवमेंट अकैडमी पुरस्कार मिला। इसे अब ऑस्कर अवॉर्ड के रूप में जाना जाता है।
गौरतलब है कि सत्यजीत रे का जन्म 2 मई, 1921 को कोलकाता में हुआ था। उनकी शिक्षा-दीक्षा भी कोलकाता में हुई। उन्होंने प्रेसिडेंसी कॉलेज और विश्व भारती यूनिवर्सिटी से शिक्षा हासिल की और चित्रकार के रूप में अपने करियर की शुरुआत की। फ्रांसिसी फिल्म निर्देशक ज्यां रेनुआ से मुलाकात और लंदन में इतालवी फिल्म लाद्री दी बिसिक्लेत (बाइसिकिल चोर) देखने के बाद उनका रुझान फिल्म निर्देशन की ओर हो गया। उन्होंने अपने करियर में कुल 37 फिल्मों का निर्देशन किया। उनकी पहली फिल्म पथेर पांचाली थी, जिसने कुल 11 अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार जीते थे। इसके अलावा अपराजितो, अपुर संसार,अपु त्रयी जैसी शानदार फिल्में भी उन्होंने बनाईं। फिल्म निर्देशन के अलावा सत्यजीत रे अपनी फिल्मों से जुड़े कई काम खुद ही करते थे, जिनमें कहानी लेखन, पार्श्व संगीत, स्क्रीन प्ले और एडिटिंग आदि कार्य शामिल थे। साल 1992 में उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से नवाजा गया।
जानकारी के मुताबिक, रविंद्र नाथ टैगोर ने आजादी के आंदोलन में बहुत रचनात्मक योगदान दिया। उन्होंने जन गण मन की रचना की। वैसे तो इसे मूल रूप से साल 1911 में जॉर्ज पंचम के स्वागत के लिए लिखा गया था, लेकिन बाद में इसी साल कांग्रेस के कोलकाता अधिवेशन में गाया गया। वहीं, आजादी के बाद जन गण मन को राष्ट्रगान का दर्जा दिया गया। रविंद्र नाथ टैगोर द्वारा रचित आमार सोनार बांग्ला बांग्लादेश का राष्ट्रगान है। उन्हें दो देशों के राष्ट्रगान की रचना करने की विशिष्ट उपलब्धि हासिल है। रविंद्र नाथ टैगोर पश्चिम बंगाल की संस्कृति में रचे-बसे हैं। उनकी रचनाओं पर जो गीत गाए जाते हैं, उन्हें बंगाल में रविंद्र संगीत के नाम से जाना जाता है।