25 सीटों पर 80 फीसदी से ज्यादा मतदान
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चुनावी धांधली और पुलिस लाठीचार्ज के आरोपों के बीच बृहस्पतिवार को राज्य विधानसभा चुनावों के छठे और आखिरी दौर में दो जिलों की 25 सीटों पर लगभग 80 फीसद से ज्यादा वोट पड़े। चुनाव आयोग के सूत्रों ने बताया कि मतदान कुल मिला कर शांतिपूर्ण रहा। दोपहर एक बजे तक ही औसतन 62 फीसद मतदान हो चुका था। पूर्व मेदिनीपुर जिले में 63.61 फीसद मतदान हुआ था जबकि कूचबिहार में यह आंकड़ा 58.81 फीसद था। अगले दो घंटों यानी शाम तीन बजे तक यह आंकड़ा बढ़ कर 74.15 फीसद तक पहुंच गया।
इसी दौर में कूचबिहार जिले में देश के 9,776 नए नागरिकों ने भी मतदान किया। इसी चरण में पूर्व मेदिनीपुर जिले की उस नंदीग्राम और खेजुरी सीटों पर भी मतदान हुआ जिसने अधिग्रहण विरोधी आंदोलन के लिए एक दशक पहले पूरी दुनिया में सुर्खियां बटोरी थीं। आज जिन 25 सीटों के लिए मतदान हुआ उनमें से 16 पूर्व मेदिनीपुर जिले में हैं और नौ कूचबिहार में। इन सीटों के लिए 170 उम्मीदवार मैदान में थे।
कूचबिहार जिले के शीतलकुची विधानसभा क्षेत्र में पुलिस ने कुछ वोटरों पर लाठीचार्ज किया। इसमें कम से कम छह लोग घायल हो गए। इसी जिले के तूफानगंज में तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने माकपा के एक पोलिंग एजंट की पिटाई कर दी। पुलिस ने बताया कि पूर्व मेदिनीपुर जिले में वोटरों को धमकाने के आरोप में पांच तृणमूल कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है। विपक्ष ने जिले के रामनगर विधानसभा क्षेत्र में तृणमूल कांग्रेस के समर्थन से बाहरी लोगों पर मतदान केंद्रों के भीतर जाकर वोटरों को धमकाने का आरोप लगाया। इसी जिले के मोयना विधानसभा क्षेत्र में कथित तृणमूल कार्यकर्ताओं ने माकपा के एक पोलिंग एजंट के घर में तोड़-फोड़ की। वहां तृणमूल ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर हथियार समेत मतदान केंद्र के बाहर जमा होने का और कम से कम तीन मतदान केद्रों को जाम करने आरोप लगाया।
विपक्ष का आरोप
विपक्ष ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस की धमकी की वजह से नंदीग्राम इलाके के 52 मतदान केंद्रों पर उसके पोलिंग एजंट नहीं पहुंच सके। लेकिन इलाके के तृणमूल कांग्रेस सांसद और उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी ने इन आरोपों को निराधार करार देते हुए कहा कि इसके लिए उनकी पार्टी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
सुरक्षा के मजबूत इंतजाम
इस दौरान चुनाव आयोग ने सुरक्षा का मजबूत इंतजाम किया था। विभिन्न मतदान केंद्रों में केंद्रीय बलों की 361 कंपनियों के अलावा राज्य पुलिस के 12 हजार जवानों को तैनात किया गया था। मतदान वाले इलाकों में किसी गड़बड़ी को रोकने के लिए धारा 144 लागू कर दी गई थी।