पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती पर पश्चिम बंगाल कांग्रेस के एक ट्वीट ने विवाद खड़ा कर दिया है। कांग्रेस के इस ट्वीट में राजीव गांधी के कथित बयान 'जब पेड़ गिरता है, तो धरती हिलती है' को ट्वीट किया गया। हालांकि विवाद के बाद पश्चिम बंगाल कांग्रेस ने इस ट्वीट को हटा लिया है।
गौरतलब है कि राजीव गांधी के इस बयान को 1984 के सिख विरोधी दंगों का अहम कारक माना जाता रहा है। राजीव गांधी की पूरी जिंदगी इस बयान के लिए आलोचना होती रही।
1984 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी ने यह बयान दिया था। कहा जाता है कि राजीव गांधी का यह बयान दंगों के लिए एक तरह से कांग्रेस नेताओं को अनुमति देना था। इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली और देश के दूसरे राज्यों में सिखों के खिलाफ दंगे भड़क उठे।
हालांकि इससे पहले तक कांग्रेस ने कभी इस बयान को आधिकारिक रूप से स्वीकारा नहीं, लेकिन इस ट्वीट के बाद एक बार फिर सिख दंगों को लेकर कांग्रेस के रवैये की आलोचना शुरू हो गई है।
मामले पर सफाई देते हुए पश्चिम बंगाल कांग्रेस के अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस का ट्विटर हैंडल हैक हो गया था। ऐसा राजनीतिक साजिश के तहत किया गया है। पार्टी इस बारे में पुलिस में शिकायत दर्ज कराएगी।
सिखों के कत्लेआम को जस्टिफाई करने की कोशिश
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मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए आप नेता एचएस फुल्का ने कहा कि राजीव गांधी ने इस बयान के जरिए हजारों सिखों के कत्लेआम को जस्टिफाई किया था और एक बार फिर कांग्रेसी ट्वीट के जरिए इसको जस्टिफाई करने की कोशिश कर रहे हैं।
बीजेपी प्रवक्ता नलिन कोहनी ने कांग्रेस से माफी मांगने को कहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी को देश से माफी मांगनी चाहिए, जो हजारों सिखों के कत्लेआम के लिए जिम्मेदार हैं।
कांग्रेस प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि विपक्षी दल बार-बार इस चीज को उठाकर, राजनीतिक रूप से फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं। जो लोग इसका फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें यह भारी पड़ेगा।
कांग्रेस के लिए भारी पड़ेगा ट्वीट
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बंगाल कांग्रेस के ट्वीट ने सिखों दंगों पर एक बार फिर विवादों को हवा दे दी है और सियासी पार्टियों ने कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। गौरतलब है कि अगले साल पंजाब में चुनाव होने वाले हैं और कांग्रेस के लिए यह भारी पड़ सकता है। अकाली दल और बीजेपी का गठबंधन एक बार फिर सिख विरोधी दंगों पर कांग्रेस को घेर सकता है।
दूसरी ओर आम आदमी पार्टी भी पंजाब चुनाव में पूरी मजबूती से उतर रही है और सिखों को लुभाने की कोशिश में है। जिस तरीके से विपक्षी पार्टियों ने इस मुद्दे को लपका है कि कांग्रेस का बैकफुट पर जाना तय है।