यह पहली बार नहीं है जब राज्य में इस तरह की घटना हुई हो। याद रहे कि करीब दो साल पहले जब ममता सरकार की पुलिस ने सीबीआई की टीम को रोक दिया था। दरअसल, मामला यह था कि शारदा चिटफंट घोटाले में सीबीआई के 40 अधिकारी पूछताछ के लिए तत्कालीन पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के घर पहुंचे थे।
उस समय स्थानीय पुलिस ने सीबीआई अधिकारियों को घर के अंदर घुसने से रोक दिया था। इसके अलावा सीबीआई अधिकारियों को जबरदस्ती पुलिस जीप में बैठाया और थाने ले गए थे। इसी दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पुलिस कमिश्नर के घर पहुंची थीं। इसके कुछ ही देर बाद वह (ममता बनर्जी) सीबीआई की कार्रवाई के विरोध में मोदी सरकार के खिलाफ धरने पर बैठ गईं थीं।
वहीं, एक साल पहले की बात याद कीजिए, जब अमित शाह के हेलीकॉप्टर को पश्चिम बंगाल में उतरने की इजाजत नहीं मिली थी। उस समय शाह भाजपा के अध्यक्ष थे। दरअसल, शाह को लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण के मतदान के लिए बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को पश्चिम बंगाल के जाधवपुर में सुबह 11.30 बजे रैली को संबोधित करना था। मगर इजाजत नहीं मिलने के कारण उनकी रैली नहीं हो सकी थी। हालांकि इससे पहले भी ममता बनर्जी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ समेत कई बीजेपी नेताओं के हेलीकॉप्टर को उतरने की अनुमति नहीं दी थी।