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मतुआ समुदाय का इंतजार होगा खत्म?: सीएम शुभेंदु अधिकारी बोले- 31 दिसंबर तक सभी पात्र लोगों को मिलेगी नागरिकता

Fri, 06 Nov 2026 11:30 PM IST
प्रशांत तिवारी पीटीआई, कोलकाता

सार

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सीएए के तहत सभी पात्र आवेदकों को 31 दिसंबर तक नागरिकता देने का वादा किया है। नदिया और उत्तर 24 परगना में करीब 2.5 लाख आवेदन लंबित हैं।
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मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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पश्चिम बंगाल में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। भाजपा नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को बड़ा एलान करते हुए कहा कि सीएए के तहत नागरिकता पाने के योग्य सभी लोगों के आवेदनों का निपटारा 31 दिसंबर तक कर दिया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कोई भी पात्र व्यक्ति नागरिकता पाने से वंचित नहीं रहेगा और तय समय के भीतर सभी को प्रमाण पत्र जारी कर दिए जाएंगे।

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नदिया और उत्तर 24 परगना में सबसे ज्यादा आवेदन
नदिया जिले के अरंगहाटा में काली पूजा पंडाल का उद्घाटन करने पहुंचे  शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि नदिया और उत्तर 24 परगना जिलों में सीएए के तहत करीब 2.5 लाख आवेदन लंबित हैं। दोनों जिले बांग्लादेश की सीमा से सटे हैं और यहां बांग्लादेश से आकर बसे लोगों की बड़ी आबादी रहती है। इनमें मतुआ समुदाय के लोग भी शामिल हैं, जो लंबे समय से भारतीय नागरिकता की मांग कर रहे हैं।

जिलाधिकारियों को दी गई जिम्मेदारी
अधिकारी ने कहा कि लंबित आवेदनों को जल्द निपटाने के लिए सरकार ने काम तेज कर दिया है। इस संबंध में जिलाधिकारियों को गृह विभाग की ओर से जरूरी प्रशिक्षण दिया गया है। वहीं, अनुमंडल अधिकारी (SDO) आवेदनों की जांच और सत्यापन की निगरानी करेंगे। जरूरत के मुताबिक सुनवाई भी होगी, ताकि किसी का आवेदन बेवजह लंबित न रहे।
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क्या है सीएए और किसे मिलेगा इसका फायदा?
नागरिकता संशोधन कानून दिसंबर 2019 में संसद से पास हुआ था। इसके तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है। इसके लिए शर्त है कि वे 31 दिसंबर 2014 या उससे पहले भारत आ चुके हों। इन लोगों को अपने देश में धार्मिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा हो। केंद्र सरकार ने मार्च 2024 में इस कानून से जुड़े नियम जारी किए थे, जिसके बाद नागरिकता देने की प्रक्रिया शुरू हो सकी।

मतुआ समुदाय के बीच अहम है नागरिकता का मुद्दा
पश्चिम बंगाल के नदिया और उत्तर 24 परगना जिलों में सीएए का मुद्दा काफी अहम माना जाता है। खासकर मतुआ समुदाय के लोग लंबे समय से नागरिकता मिलने का इंतजार कर रहे हैं।  शुभेंदु अधिकारी ने पिछली टीएमसी सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उसने सीएए को लागू करने में गंभीरता नहीं दिखाई, जिसके चलते बड़ी संख्या में आवेदन अटके रहे।

मंदिरों और मठों के जीर्णोद्धार पर खर्च होंगे 1,000 करोड़
शुभेंदु अधिकारी ने धार्मिक स्थलों को लेकर भी एक बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अगले दो साल में पुराने मठों और मंदिरों के जीर्णोद्धार पर 1,000 करोड़ रुपये खर्च करेगी। इसके लिए 'तीर्थक्षेत्र सर्किट' नाम से योजना तैयार की जा रही है। इस योजना में ट्रस्ट, देवोत्तर संस्थाओं और सार्वजनिक संगठनों के तहत चलने वाले धार्मिक स्थल शामिल होंगे। हालांकि, निजी स्वामित्व वाले मंदिरों और संस्थानों को इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा।

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पूजा-पर्वों को लेकर भी पिछली सरकार पर साधा निशाना
अधिकारी ने पिछली टीएमसी सरकार पर धार्मिक आयोजनों में अड़चन डालने का आरोप भी लगाया। उनका कहना था कि दुर्गा पूजा और प्रतिमा विसर्जन के जुलूसों की अनुमति देने में कई तरह की पाबंदियां लगाई जाती थीं, जिससे लोगों को परेशानी होती थी। उन्होंने मौजूदा सरकार की ओर से धार्मिक स्थलों के विकास और लोगों को नागरिकता दिलाने की दिशा में काम करने का भरोसा जताया।

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