पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी सरगर्मियां बढ़ गई हैं। माकपा के युवा नेता प्रतिकुर रहमान ने जहां टीएमसी का दामन थाम लिया है। वहीं, भाजपा सांसद अनंत महाराज मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ मंच पर नजर आए हैं। पढ़ें रिपोर्ट-
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की राज्य समिति के सदस्य प्रतिकुर रहमान शनिवार को तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए। इससे पहले उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के सासंद और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी से मुलाकात की। टीएमसी में शामिल होने के बाद रहमान ने कहा, यह तो केवल ट्रेलर है, पिक्चर अभी बाकी है।
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भाजपा सांसद ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ मंच साझा किया
उधर, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाषा दिवस के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राज्यसभा सांसद अनंत महाराज को बंगविभूषण पुरस्कार से सम्मानित किया। इस अवसर पर सांसद ने मुख्यमंत्री के साथ मंच साझा किया।
रहमान के टीएमसी में शामिल होने पर विशेषज्ञ क्या बोले?
विशेषज्ञों ने बताया कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में हाल ही में बड़ा बदलाव हुआ है। प्रतिकुर रहमान पहले माकपा के युवा नेता थे, वह टीएमसी में शामिल हो गए। यह कदम राज्य चुनावों से पहले आया है। इससे टीएमसी को मुसलमान मतदाताओं के बीच अपनी लोकप्रियता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। लेकिन, विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि रहमान को टीएमसी की कार्यशैली के अनुसार खुद को ढालना होगा, वरना यह बदलाव उनके लिए उतना फायदेमंद नहीं होगा।
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आम चुनाव में अभिषेक बनर्जी के खिलाफ मैदान में उतरे थे रहमान
रहमान ने 2024 के आम चुनावों में डायमंड हार्बर लोकसभा सीट से टीएमसी के अभिषेक बनर्जी के खिलाफ चुनाव लड़ा और एक सक्रिय वाम नेता के रूप में तृणमूल के आक्रामक हमलों का सामना किया। प्रतिकुर रहमान दक्षिण 24 परगना के अम्ताला में टीएमसी के दूसरे नंबर के नेता अभिषेक बनर्जी की मौजूदगी में सत्तारूढ़ पार्टी में शामिल हुए। इससे पहले प्रतिकुर ने मीडिया से अपना असंतोष जाहिर करते हुए कि माकपा नेतृत्व में कुछ व्यक्तियों के भाई-भतीजावाद ने उन्हें संगठन में सीमित कर दिया था।
इस्तीफा देते हुए रहमान ने क्या कहा था?
प्रतिकुर ने 16 फरवरी को माकपा की राज्य समिति और प्राथमिक सदस्यता से यह कहते हुए इस्तीफा दिया था कि वह हाल के समय में कुछ मुद्दों पर पार्टी के जिला और राज्य नेतृत्व के विचार और रणनीतियों से सहमत नहीं थे। उन्होंने कहा, वे चाहते थे कि मैं सवाल किए बिना वफादार बना रहूं और मुझे किनारे कर दिया गया, क्योंकि मैंने पार्टी की विचारधारा और सिद्धांतों पर सवाल उठाए।