दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह ने विशेष बैठक की, जिसमें गृह सचिव राजीव गौबा, एनएसए अजीत डोभाल, आईबी प्रमुख और गृह मंत्रालय के अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बैठक में पश्चिम बंगाल में हो रही हिंसा पर भी चर्चा हुई है।
वहीं दूसरी ओर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी राज्यस्तरीय पदाधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। कहा जा रहा है कि बैठक में राज्य की प्रशासनिक और कानून व्यवस्था समेत विभिन्न मुद्दों पर गंभीर चर्चा की गई।
भाजपा महासचिव और पार्टी के पश्चिम बंगाल प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन की जरूरत बता दी है। उन्होंने कहा कि बंगाल में हिंसा की जिम्मेदारी ममता बनर्जी की है। ममता बदले की भावना से लोगों को भड़का रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सारे गुंडे सत्ताधारी तृणमूल के पास ही हैं। उनके पास पिस्तौल और बम हैं। हमारे कार्यकर्ताओं के पास कोई हथियार नहीं है। बंगाल में ऐसे ही हिंसा होती रही तो केंद्र को हस्तक्षेप करना पड़ेगा और ऐसे में राष्ट्रपति शासन लागू हो सकता है।
भाजपा ने पश्चिम बंगाल में अपने कार्यकर्ताओं की हत्या और बिगड़ती कानून व्यवस्था के विरोध में सोमवार को काला दिवस मनाया। पार्टी ने 12 घंटे के बंद का आह्वान किया था, जिसके बाद पार्टी कार्यकर्ताओं ने काली पट्टी बांध कर राज्य के कई हिस्सों में रैलियां निकालीं। कई स्थानों पर सड़कों और रेलवे पटरियों पर वाहनों और गाड़ियों की आवाजाही बाधित कर दी।
भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के बीच शनिवार को बशीरहाट के संदेशखली इलाके में संघर्ष के बाद से यहां स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। पुलिस ने भारी संख्या में जवानों की तैनाती कर रखी है।
टीएमसी ने गृह मंत्रालय की एडवाइजरी को विपक्ष शासित राज्यों में सत्ता हथियाने का षड्यंत्र बताया है। पार्टी ने अमित शाह को सोमवार को लिखे एक पत्र में आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल सरकार को भेजा गया गृह मंत्रालय का परामर्श विपक्ष शासित राज्यों में सत्ता हथियाने का गहरा षड्यंत्र है।
तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री पार्थ चटर्जी ने पत्र में लिखा कि हमारे पास यह मानने का कारण है कि यह राजनीतिक रूप से भाजपा के विरोधी दलों के शासन वाले राज्यों में सत्ता हथियाने के लिए चली गई चाल है। इतना ही नहीं, यह राज्य सरकार को बदनाम करने और अलोकतांत्रिक, अनैतिक तथा असंवैधानिक तरीकों से पश्चिम बंगाल का प्रशासन हथियाने के लिए रचा गया एक गहरा षड्यंत्र है।
बंगाल में जारी सियासी संघर्ष और हत्याओं पर केंद्र सरकार ने गहरी चिंता जताई है। ममता सरकार को जारी एडवाइजरी में गृह मंत्रालय ने कहा कि चुनाव के बाद भी जारी हिंसाएं राज्य सरकार की नाकामी दिखाती है। टीएमसी सरकार को राज्य में कानून व्यवस्था बनाए रखने और हिंसा में नाकाम पदाधिकारियों पर कार्रवाई करने को कहा गया है।
गृह मंत्रालय की एडवाइजरी के जवाब में पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव मलय कुमार डे ने गृह मंत्रालय को पत्र लिख कर जवाब दिया है। इसमें उन्होंने राज्य में हालात काबू में होने का दावा किया है। पत्र में लिखा है कि चुनाव के बाद कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा हिंसा की गई थी।
इस प्रकार के मामलों को रोकने के लिए अधिकारियों द्वारा बिना किसी देरी के कार्रवाई की गई। मलय ने आगे लिखा कि राज्य में स्थिति नियंत्रण में है और इस प्रकार की घटनाओं के आधार पर राज्य में कानून व्यवस्था को असफल नहीं माना जा सकता।
बंगाल भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने सोमवार को कहा कि पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था ध्वस्त हो गई है। आज यहां जो स्थिति है, वह 20 साल पहले के कश्मीर की याद दिलाती है। उन्होंने कहा कि टीएमसी के 'राजनीतिक आतंकवादी' दिन दहाड़े भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या कर रहे हैं और पुलिस मूक दर्शक बनी रही। वही पुलिस बसंती हाईवे पर कार्यकर्ताओं के शव वाहन रोकती है।
शनिवार को भाजपा और टीएमसी कार्यकर्ताओं के बीच खूनी संघर्ष हुआ था। झड़प के बीच पांच लोगों की हत्या की खबर आई थी। रविवार तक संदेशखली में झड़पों में मारे गए लोगों के शव बरामद किए गए थे, जबकि कई अन्य लापता थे। भाजपा ने दावा किया है कि उसके पांच कार्यकर्ता मारे गए थे, जबकि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने दावा किया था कि उसका एक कार्यकर्ता मारा गया।