भारत सहित दुनिया के कई देशों में मोटापा बड़ी समस्या बना हुआ है। ऐसा नहीं है कि मोटापे से केवल बड़ी उम्र के लोग ही प्रभावित हैं। बड़ी संख्या में बच्चे भी इस समस्या का सामना कर रहे हैं। मोटापा कई स्वास्थ्य समस्याओं का प्रमुख कारण है। वैश्विक स्तर पर लगभग दो अरब बच्चे और वयस्क इस तरह की समस्याओं से पीड़ित हैं।
बच्चों के मोटापे के मामले में दुनियाभर में चीन पहले स्थान पर बना हुआ है। इसके बाद भारत का नंबर है। भारत में लगभग 1.44 करोड़ बच्चे अधिक वजन वाले हैं। एक शोध के अनुसार, दुनिया के कुल आबादी का लगभग एक चौथाई हिस्सा 2045 तक मोटापे से ग्रस्त हो जाएगा। उस समय तक इनकी संख्या 22 प्रतिशत के आस-पास होगी।
ऐसे होती है मोटापे की पहचान
बॉडी मास इंडेक्स के द्वारा मोटापे की पहचान की जाती है। 85 प्रतिशत से 95 प्रतिशत तक बीएमआई वाले बच्चों को मोटा माना जाता है। मोटापे और ज्यादा वजनी बच्चे मधुमेह और हृदय संबंधी बीमारियों की चपेट में जल्दी आ सकते हैं।
बच्चों में मोटापे की वृद्धि दर वयस्कों की तुलना में अधिक
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
बच्चों में मोटापे की वृद्धि दर वयस्कों की तुलना में बहुत अधिक है। देश में हर साल मोटे बच्चों की तादात तेजी से बढ़ रही है। हर साल बच्चों के मोटे होने के लगभग एक करोड़ नए मामले सामने आ रहे हैं।
यूनिवर्सिटी ऑफ कोलंबिया के वैज्ञानिकों ने अपने शोध में बच्चों में मोटापे का खतरा बढ़ाने वाले जीन का पता लगाया है। शोध के अनुसार, एफटीओ जीन जिसे सिंगल न्यूक्लियोटाइड पॉलिमोर्फिज्म कहते हैं इससे बच्चों का खान-पान प्रभावित होता है।
इस शोध के अनुसार, पांच से 10 साल के बच्चों पर हुए शोध से पता चला है कि इस जीन के कारण बच्चे अधिक कैलोरी ग्रहण करने लगते हैं। ऐसे में आगे चलकर उनका वजन बढ़ने की संभावना ज्यादा होती है।
किसे कहेंगे मोटापा?
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जब कोई वयस्क या बच्चा अपनी उम्र या समान ऊंचाई के अन्य लोगों से ज्यागा भारी हो तो उसे मोटापा कहा जा सकता है। मोटापा बढ़ने के कारणों में खानपान प्रमुख कारण है। जंक फूड एवं पैक्ड फूड में नमक, फैट एवं कोलेस्ट्रॉल मोटापे को बढ़ा रहे हैं। जबकि टीवी, इंटरनेट, कम्प्यूटर व मोबाइल गेम्स का ज्यादा प्रयोग भी बच्चों को शारीरिक श्रम से दूर कर रहा है।