पश्चिम बंगाल में ‘अनमैप्ड’ वोटरों को लेकर उठे विवाद के बीच राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने जिला चुनाव अधिकारियों के लिए नई और अहम गाइडलाइन जारी की है। इन निर्देशों का उद्देश्य डेटा त्रुटियों के कारण सामने आए मामलों को सुलझाना और बुजुर्ग, बीमार व दिव्यांग मतदाताओं को अनावश्यक परेशानियों से बचाना है। इस फैसले का तृणमूल कांग्रेस महासचिव अभिषेक बनर्जी ने स्वागत किया है।
डेटा कन्वर्जन की गलती से पैदा हुई समस्या
सीईओ कार्यालय के मुताबिक, ‘अनमैप्ड’ मतदाताओं की समस्या वर्ष 2002 की मतदाता सूची के पीडीएफ डेटा को सीएसवी फॉर्मेट में बदलने के दौरान हुई तकनीकी त्रुटियों के कारण सामने आई। इस वजह से कुछ मतदाताओं की जानकारी BLO ऐप में लिंक नहीं हो पाई, जबकि उनकी जानकारी 2002 की प्रमाणित हार्ड कॉपी में मौजूद है।
अभिषेक बनर्जी का बयान
तृणमूल कांग्रेस महासचिव अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया पर कहा कि उनकी पार्टी ने यह मुद्दा लगातार रचनात्मक तरीके से उठाया था और सीईओ से मुलाकात के बाद त्वरित कदम उठाए गए। उन्होंने चुनाव आयोग से अपील की कि 60 वर्ष से अधिक उम्र के बीमार वरिष्ठ नागरिकों को भी मानवीय आधार पर राहत दी जाए, ताकि उन्हें अनावश्यक परेशानी न झेलनी पड़े। सीईओ कार्यालय ने साफ किया है कि ये निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू होंगे और सभी जिला चुनाव अधिकारियों को इनका सख्ती से पालन करना होगा।
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बुजुर्ग और कमजोर वोटरों को बड़ी राहत
नई गाइडलाइन के तहत 85 वर्ष से अधिक उम्र के मतदाता, गंभीर रूप से बीमार या दिव्यांग व्यक्ति यदि अनुरोध करें, तो उन्हें व्यक्तिगत सुनवाई के लिए नहीं बुलाया जाएगा। ऐसे मामलों में चुनाव अधिकारी फोन पर संपर्क कर सकते हैं और सत्यापन घर जाकर किया जाएगा। जिन मतदाताओं को पहले ही सुनवाई का नोटिस जारी हो चुका है, उन्हें भी आने से रोका जा सकता है।
जिन जिलों ने अब तक ‘अनमैप्ड’ मतदाताओं की प्रमाणित सूची सीईओ कार्यालय को नहीं भेजी है, उन्हें जल्द ऐसा करने के निर्देश दिए गए हैं। सूची अपलोड होने के बाद ही व्यक्तिगत सुनवाई से छूट का लाभ मिलेगा। इसके अलावा BLO घर जाकर फोटो के साथ फील्ड वेरिफिकेशन कर सकेंगे और जरूरी दस्तावेज अपलोड करेंगे।
चुनाव आयोग से सिस्टम सुधार की मांग
सीईओ कार्यालय ने चुनाव आयोग से यह भी अनुरोध किया है कि बीएलओ, ईआरओ और एईआरओ को 2002 की मतदाता सूची के प्रासंगिक हिस्से अपलोड करने की अनुमति दी जाए, ताकि तकनीकी स्तर पर जल्द सुधार हो सके। जब तक सिस्टम में सुधार नहीं होता, तब तक ऐसे मतदाताओं को सुनवाई के लिए न बुलाने के निर्देश दिए गए हैं।