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पश्चिम बंगाल: सुवेंदु अधिकारी की भाजपा बनाम पुरानी भाजपा में मचा घमासान

Sun, 06 Jun 2021 11:44 AM IST
प्रशांत कुमार शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पश्चिम बंगाल भाजपा में इन दिनों सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। ऐसा इसलिए कि पार्टी के नेता और कार्यकर्ता एक दूसरे पर बयानबाजी कर रहे हैं। इतना ही नहीं कई कार्यकर्ताओं ने पार्टी का दामन भी छोड़ दिया है। 
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बंगाल भाजपा में कलह - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद पश्चिम बंगाल भाजपा में घमासान जारी है। यह घमासान दिलीप घोष की भाजपा और विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेन्दु अधिकारी की भाजपा में मचा हुआ है। बंगाल भाजपा के एक उपाध्यक्ष का कहना है कि यही हाल रहा तो वह सब घर बैठ जाएंगे। भाजपा की महिला विधायक का कहना है कि हारने के बाद स्थिति बहुत खराब हो गई है। हमारे जमीनी कार्यकर्ता ही हमें छोड़कर जा रहे हैं। भाजपा के पुराने लोग भी सुवेन्दु अधिकारी और तृणमूल से आए नेताओं के रवैये से खुश नहीं हैं। आगे जाने क्या होगा?
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पार्टी के विधायक का कहना है कि तृणमूल से आए पांच छह विधायक ही चुनाव जीते हैं। मुझे यह बात समझ में नहीं आ रही है कि नेता प्रतिपक्ष बनाने के लिए किसी पुराने भाजपाई की बजाय सुवेन्दु को क्यों चुना गया। इस निर्णय के कारण भाजपा के पुराने नेताओं, कार्यकर्ताओं में न केवल नाराजगी है, बल्कि तृणमूल की नेता और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी हमने भड़काने का काम किया है। यह अच्छा नहीं हुआ। नेताओं में पार्टी के एक अन्य नेता ने कहा कि मुकुल राय टीएमसी से भाजपा में आए थे। उनका बेटा तृणमूल में शामिल हो गया है। यह कोई छोटा संकेत नहीं है। इसे केन्द्रीय नेतृत्व को समझना चाहिए। केन्द्रीय नेतृत्व को एक बात और समझनी चाहिए कि लोकसभा चुनाव 2019 में हम 18 सीटें जीते थे, लेकिन चुनाव के बाद इस कदर हिंसा नहीं हुई थी। इस बार क्यों हुई? कारण क्या है?

तृणमूल से आए भाजपाई और मूल भाजपाई में बढ़ा टकराव

भाजपा की एक नेता बताती हैं कि उन्हें चुनाव में पार्टी के ही नेताओं ने हराने की कोशिश की। हालांकि, वह चुनाव जीत गईं। वह बताती  हैं कि जब तृणमूल से भाजपा में आने के लिए प्रयास कर रहे एक नेता की इंट्री के खिलाफ अपनी राय रखी तो उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। इतना ही नहीं नोटिस को बाकायदा प्रेस में दे दिया गया और उन्हें परेशान तक किया गया। यह तो कोई अच्छी बात नहीं थी। वह कहती हैं कि उन्हें लग रहा है कि अगर भाजपा के शीर्ष नेताओं ने पश्चिम बंगाल भाजपा को गंभीरता से नहीं लिया तो कई विधायक और नेता तृणमूल का दामन थाम सकते हैं। 
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भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष अग्निमित्रा पॉल कहती हैं कि राज्य में भाजपा कार्यकर्ताओं की सुरक्षा अभी भी बड़ा मसला है। महीनों से लोग घर छोड़कर गायब हैं। हमें लड़कियों, महिलाओं की वापसी के लिए तृणमूल के विधायकों से गुहार लगानी पड़ रही हैं। हालांकि अग्निमित्रा पॉल कहती हैं कि गुहार लगाने के बाद तृणमूल के लोग हमारी सहायता करते हैं। पार्टी के एक अन्य नेता कहते हैं कि हम चाहे जो दावा करें, लेकिन मानना पड़ेगा कि तृणमूल का संगठन हमसे बहुत मजबूत है।

रणनीतिक चूक: बंगाल में 'श्रीराम' नहीं चलते, 'दुर्गा, सरस्वती, काली' का राज्य है

पार्टी की एक वरिष्ठ नेता कहती हैं कि अपनी पार्टी के बुद्धिमान नेताओं के खिलाफ क्या बोलना, लेकिन भाजपा ने कई रणनीतिक चूक की। एक तो पुराने भाजपाई नेताओं पर भरोसा नहीं किया, जबकि इसी दिलीप घोष की अध्यक्षता, प्रधानमंत्री मोदी के चेहरे, अमित शाह की रणनीति के सहारे हम 2019 में 18 सीट लेकर आए थे। लेकिन न जाने क्यों भाजपा को तृणमूल की बी टीम बना दिया गया?
दूसरी सबसे बड़ी चूक कि हर जगह 'जय श्रीराम' की गूंज रही। हमारे नेता नहीं समझ पाए कि बंगाल में जयश्रीराम नहीं चलते। यहां मां दुर्गा, काली, सरस्वती की पूजा होती है। उनकी महिमा चलती है। बताती हैं कि इसने पूरे बंगाल और बंगाली को तृणमूल के साथ एकजुट कर दिया। हम तो सोच रहे थे कि इस बार चुनाव जीतेंगे, लेकिन चुनाव का परिणाम उल्टा आया।

यह नहीं सोचा कि हारने के बाद कार्यकर्ताओं, नेताओं का क्या होगा?
पार्टी के एक अन्य विधायक को उम्मीद नहीं थी कि टिकट मिलेगा। लेकिन मिला और जीत गए। वह कहते हैं विधानसभा चुनाव को भाजपा ने आर या पार की शैली में लड़ा। हम करो या मरो पर उतर आए। वह कहते हैं कि हमारे रणनीतिकारों को करीब 150 से अधिक सीटें आने का भरोसा था। इसलिए हमने सोचा ही नहीं कि यदि चुनाव हार गए तो नेताओं और कार्यकर्ताओं की सुरक्षा कैसे होगी? अब नतीजा सामने है तो सिर पर हाथ रखकर बैठे हैं। वह कहते हैं कि चुनाव के समय मंच से 'टीएमसी के गुंडों से दो मई के बाद निबटने' जैसा संबोधन करके पार्टी के बड़े नेताओं को नहीं ललकारना चाहिए था। हमें समझना चाहिए था कि ममता बनर्जी प्रतिक्रियावादी राजनीति में विश्वास करती हैं।
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