बहरहाल, बरला की तरह खान की मांग को पार्टी के राज्य नेतृत्व ने मंजूरी नहीं दी और स्पष्ट रूप से कहा कि वह बंगाल के विभाजन के पक्ष में नहीं है। बिष्णुपुर से लोकसभा सदस्य ने दावा किया कि वर्षों से जंगलमहल इलाके का विकास नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों की मांग तभी पूरी होगी, जब इलाके को बंगाल से अलग किया जाए और इसे राज्य का दर्जा दिया जाए।
खान ने कहा कि मेरा मानना है कि रोजगार और विकास की मांग को पूरा करने के लिए पुरुलिया, बांकुड़ा, झाड़ग्राम, बीरभूम के कुछ हिस्से तथा दो मेदिनीपुर जिलों और कुछ अन्य क्षेत्रों को मिलाकर जंगलमहल राज्य बनाया जाना चाहिए। जॉन बारला ने उत्तर बंगाल के लोगों की शिकायतों की आवाज उठाई है। मैं भी अपने क्षेत्र के लोगों के लिए यह मांग कर रहा हूं।
उन्होंने कहा कि उनकी मांग में कुछ भी अलगाववाद जैसा नहीं है। खान ने कहा कि यह भारत का हिस्सा होगा और क्षेत्र को केंद्र द्वारा वित्तीय पैकेज से इंकार नहीं किया जाएगा जैसा कि तृणमूल कांग्रेस के शासन में होता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को बाहरी कहती रही हैं। जंगलमहल को लोगों को क्यों नहीं उनके लिए भी ऐसे ही शब्द इस्तेमाल करने चाहिए?
पार्टी ने कहा- हम विभाजन के पक्ष में नहीं
खान के विचारों से खुद को अलग करते हुए भाजपा प्रवक्ता शौमिक भट्टाचार्य ने कहा कि पार्टी बंगाल के विभाजन की मांग का समर्थन नहीं करती है। भट्टाचार्य ने कहा कि राज्य की क्षेत्रीय अखंडता को अक्षुण्ण रखते हुए हम संपूर्ण और समग्र विकास का समर्थन करते हैं। उनसे सहमति जताते हुए भाजपा की राज्य इकाई के अध्यक्ष दिलीप घोष ने भी कहा कि पार्टी बारला और खान के विचारों का समर्थन नहीं करती है।
विभाजन की योजना विफल होगी : तृणमूल कांग्रेस
खान की टिप्पणियों को पूरी तरह खारिज करते हुए टीएमसी के प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा कि राज्य की जनता द्वारा भाजपा को खारिज किए जाने के बाद वह विभाजन का मुद्दा उठा रही है, लेकिन उनकी योजना विफल होगी।
वहीं दूसरी ओर टीएमसी सासंद सौगत रॉय ने जानना चाहा कि भाजपा बारला एवं खान को क्यों नहीं पार्टी से निकाल रही है। रॉय ने कहा कि अगर भाजपा अपने सांसदों के बयानों का समर्थन नहीं कर रही है, तो उन्हें निष्कासित क्यों नहीं कर रही है? पार्टी राज्य में अशांति फैलाने की योजना बना रही है।