पहले चरण में खड़गपुर और मेदिनीपुर विधानसभा सीट पर ग्लैमर का तड़का लगा हुआ है। मेदिनीपुर से टीएमसी ने वहीं की बाशिंदी अभिनेत्री जून मालिया को चुनाव मैदान में उतारा है। वहीं, झारग्राम से पार्टी ने संथाली समुदाय की अभिनेत्री बीरबहा हंसदा पर दांव लगाया है।
हंसदा का मुकाबला भाजपा नेता सुकुमार सतपति और माकपा उम्मीदवार मधुजा सेन रॉय से है। पुरुलिया जिले की बाघमुंडी सीट पर भाजपा ने ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन (एजेएसयू) के आशुतोष महतो को समर्थन दिया है।
उनका मुकाबला कांग्रेस के नेपाल महतो से है। टीएमसी ने बालरामपुर सीट से शांतिराम महतो को उम्मीदवार बनाया है। सालबनी से वाम मोर्चा ने पूर्व मंत्री सुशांत घोष को उतारा हैं। इससे सटे गरबेता से संयुक्त मोर्चा के उम्मीदवार तपन घोष चुनाव लड़ रहे हैं।
- कुल सीट : 30
- कुल मतदान केंद्र : 10,288
- उम्मीदवारों की संख्या : 191
- मतदाता : 73,80,492
- सुरक्षा : 659 कंपनियां तैनात
पूर्व मेदिनीपुर जिला : पटाशपुर, कांथी उत्तर, भगवानपुर, खेजुरी, एगरा, रामनगर और कांथी दक्षिण
झाड़ग्राम : बिनपुर, नयाग्राम, गोपीबल्लभपुर, झारग्राम
पश्चिम मेदिनीपुर : मेदिनीपुर खड़गपुर, गड़बेता, केशियरी, सालबनी, मेदिनीपुर, दांतन
पुरुलिया : बर्दवान, बलरामपुर, बाघमुंडी, जयपुर, पुरुलिया, मानबाजार, रघुनाथपुर, पारा, काशीपुर, बांकुड़ा छातना, रानीबांध, रायपुर, सालतोड़ा
प्रधानमंत्री मोदी व गृहमंत्री शाह ने इन क्षेत्रों में अपनी रैलियों में पानी को बड़ा मुद्दा बनाया। पुरुलिया में पाइप से जल आपूर्ति की योजना लंबे समय से ठंडे बस्ते में है। पीएम ने 18000 करोड़ की पीएम किसान योजना को लागू करने का भी वादा किया है। उधर, ममता ने यहां अनाज वितरण प्रणाली को और बेहतर करने व दुआरे सरकार (आपके द्वार पर सरकार) कार्यक्रम शुरू किया था। उन्होंने यहां के विकास व अल चिकि भाषा को लोकप्रिय बनाने का वादा किया है।
2016 : तृणमूल को 27 सीट
पहले चरण की 30 सीटों पर 91% मतदाता ग्रामीण व 9% शहरी क्षेत्र के हैं। 2016 के चुनाव में यहां की 27 सीटें टीएमसी ने जीती थीं। दो सीट कांग्रेस व एक आरएसपी के खाते में गई थी। 2019 के लोकसभा चुनाव में चारों सीटें जीतकर भाजपा ने बड़ा उलटफेर किया था। विधानसभा चुनाव में भाजपा का लक्ष्य उसी कामयाबी को दोहराने का है। लोकसभा चुनाव के बाद टीएमसी ने जोहार बंधु योजना जैसी योजनाओं से खोया जनाधार पाने की कोशिश की है। आदिवासी क्षेत्रों में खुद को मजबूत किया है। इसलिए भाजपा के लिए लोकसभा चुनाव जैसा प्रदर्शन दोहराना आसान नहीं है।