सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया जिसमें पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान एक राजनीतिक दल (भाजपा) द्वारा लगाए जा रहे जय श्रीराम के नारे पर पाबंदी लगाने की मांग की गई थी। शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता वकील एमएल शर्मा द्वारा पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को आठ चरण में आयोजित करने के निर्वाचन आयोग के फैसले को दी गई चुनौती को भी दरकिनार कर दिया।
चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने याचिकाकर्ता वकील शर्मा से कहा, हम आपसे सहमत नहीं है। पीठ ने याचिकाकर्ता वकील से कहा कि अगर आपको लगता है कि जन प्रतिनिधित्व कानून का उल्लंघन हो रहा है तो वह हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं। सुनवाई के दौरान शर्मा ने कहा कि हम चुनाव के दौरान लगाए जा रहे धार्मिक नारे के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा, राजनीतिक दल (भाजपा) पश्चिम बंगाल चुनाव प्रचार के दौरान लगातार जय श्रीराम के नारे का इस्तेमाल कर रही है।
इस पर पीठ ने कहा, सुप्रीम कोर्ट इसके लिए के लिए उचित फोरम नहीं है, आपको उचित फोरम के पास जाना चाहिए। शर्मा ने अपनी याचिका में बंगाल में आठ चरणों में हो रहे विधानसभा चुनाव को समानता के अधिकार का उल्लंघन बताया था। याचिका में कहा गया था कि उसी दौरान केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव एक चरण में, जबकि असम में तीन चरण में किया जा रहा है।
प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामसुब्रमण्यन की पीठ ने संक्षिप्त सुनवाई के बाद याचिका खारिज की। पीठ ने शुरुआत में याचिकाकर्ता एवं वकील एम एल शर्मा से कहा कि वह कलकत्ता उच्च न्यायालय के पास जाएं। शर्मा ने पीठ से कहा, ‘‘मैंने एक फैसले को आधार बनाया है। यह चुनाव संबंधी याचिका नहीं है। एक दल धार्मिक नारों का इस्तेमाल कर रहा है। मुझे उच्च न्यायालय क्यों जाना चाहिए?’’
पीठ ने शर्मा से कहा, आप अभियोग का अनुरोध कर रहे हैं। हम ऐसा आदेश कैसे पारित कर सकते हैं। चुनाव संबंधी याचिका पर अभियोग का अधिकार केवल उच्च न्यायालय के पास है।
जब याचिकाकर्ता ने शीर्ष अदालत के 1978 के आदेश का जिक्र किया, तो पीठ ने उसे फैसले का पैरा दिखाने को कहा। पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद प्रचार मुहिम में कदाचार संबंधी यचिका की सुनवाई कर सकती है।शर्मा ने कहा कि मामले की सुनवाई कल यानी बुधवार को की जाए और पीठ ने कहा कि हम इसे बार-बार नहीं पढ़ सकते, इसे अभी पढ़िए। इसके बाद पीछ ने कहा कि हम आपसे सहमत नहीं हैं। याचिका खारिज की जाती है।
याचिका में न्यायालय से आयोग को यह निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया था कि वह राज्य में आठ चरण में विधानसभा चुनाव नहीं कराए, क्योंकि इससे संविधान के अनुच्छेद 14 (समता के अधिकार)और अनुच्छेद 21(जीने के अधिकार) का उल्लंघन होता है।
बता दें कि निर्वाचन आयोग ने 26 फरवरी को पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में होने वाले चुनावों के लिए कार्यक्रम की घोषणा की थी। पश्चिम बंगाल में जहां 27 मार्च से 29 अप्रैल के बीच आठ चरणों में चुनाव होंगे वहीं तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में एक चरण में छह अप्रैल को चुनाव होंगे। असम में तीन चरणों में चुनाव होने हैं।