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Bengal Elections: जो देश में कभी नहीं हुआ वो बंगाल में हुआ, टूटे बंपर वोटिंग के सारे रिकॉर्ड

Wed, 29 Apr 2026 08:41 PM IST
Kirtivardhan Mishra स्पेशल डेस्क, अमर उजाला

सार

पश्चिम बंगाल में जहां पहले चरण में 93.19 फीसदी वोटिंग दर्ज की गई थी, वहीं आज दूसरे चरण में भी 92.67 फीसदी वोटिंग हुई है। इसी के साथ बंगाल में वोटिंग का कुल औसत 92.93 फीसदी से ज्यादा हो गया है, जो कि देश में किसी राज्य में वोटिंग का नया रिकॉर्ड है।
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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पश्चिम बंगाल में बुधवार (29 अप्रैल) को दूसरे चरण का मतदान भी पूरा हो गया। इसी के साथ अब बंगाल के दोनों चरणों में कुल 92.93 फीसदी मतदान दर्ज कर लिया गया है। आंकड़ों को उठाकर देखा जाए तो बंगाल में कभी भी 84.72 फीसदी से ज्यादा वोटिंग नहीं हुई। यानी इस बार पश्चिम बंगाल में मतदान का एक नया रिकॉर्ड स्थापित हुआ है। इतना ही नहीं, बंगाल में हुई वोटिंग देशभर में किसी भी राज्य में हुई वोटिंग के रिकॉर्ड से ज्यादा हो गई है। अब तक यह रिकॉर्ड त्रिपुरा के पास था, जहां 2013 में 91.82 फीसदी वोटिंग दर्ज की गई थी।
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हालांकि, इस बीच यह जानना अहम है कि आखिर बंगाल में इस बार पहले और दूसरे चरण को मिलाकर औसत कितनी वोटिंग दर्ज हुई है? इससे पहले राज्य में वोटिंग के क्या रिकॉर्ड रहे थे? पहले चरण और आज जहां-जहां वोटिंग हुई, 2021 के विधानसभा चुनाव में उन जगहों पर वोटिंग के दौरान कितना मतदान दर्ज किया गया था? 2021 और 2026 में कुल मतदाताओं और वोटिंग के लिए पहुंचने वालों के आंकड़े में कितना फर्क आया है? आइये जानते हैं...

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बंगाल के पहले चरण और दूसरे चरण में वोटिंग के आंकड़े?

पश्चिम बंगाल में इस बार दो चरणों में मतदान कराया गया है। जहां पहले चरण में राज्य में 93.19 फीसदी मतदान हुआ था। वहीं, दूसरे चरण में भी मतदान 92 फीसदी से ऊपर रहा है, जिसका अभी और बढ़ना लगभग तय है। इस लिहाज से देखा जाए तो बंगाल में औसत मतदान प्रतिशत 92.93 फीसदी रहा है, जो कि बंगाल में पिछले सभी चुनावों से ज्यादा है। 

इससे पहले राज्य में वोटिंग के क्या रिकॉर्ड रहे थे?

बंगाल में 2026 से पहले सबसे ज्यादा वोटिंग का आंकड़ा 2011 में दर्ज किया गया था। तब राज्य में 84.33 फीसदी वोटिंग हुई थी। यह वही चुनाव था, जब बंगाल में 34 साल से शासन कर रही लेफ्ट पार्टी का वर्चस्व खत्म हुआ था और तृणमूल कांग्रेस पहली बार जीतकर सत्ता में आई थी। तब ममता बनर्जी बंगाल की मुख्यमंत्री बनी थीं। 

मजेदार बात यह है कि बंगाल में इससे पहले 80 फीसदी से ज्यादा वोटिंग का आंकड़ा 1996 और 2006 में पहुंचा था। ममता बनर्जी के चुनाव जीतने के बाद बंगाल में वोटिंग का आंकड़ा भी लगातार 80 फीसदी के ऊपर बना रहा, लेकिन मतदान का रिकॉर्ड नहीं टूटा। 

2026 और 2021 के मतदान में क्या अंतर?

बंगाल में 2021 में जहां आठ चरणों में मतदान हुआ था। वहीं, 2026 में यह मतदान सिर्फ दो चरणों में पूरा करा लिया गया। अगर 2026 में पहले और दूसरे चरण की सीटों पर हुए मतदान की तुलना 2021 की समान सीटों पर हुए मतदान से कर लें तो सामने आता है कि 2026 में दोनों ही चरणों में पिछली बार से ज्यादा वोटिंग हुई। जहां बंगाल में 2026 के पहले चरण में 93.19 फीसदी वोटिंग हुई तो वहीं, दूसरे चरण में करीब 92 फीसदी मतदान हुआ है। इसके मुकाबले 2021 मे इन्हीं समान सीटों (2026 के पहले चरण वाली 152 सीटों)  पर 83.18 फीसदी मतदान और (दूसरे चरण की 142 सीटों) पर 81.08 फीसदी मतदान हुआ था। यही वजह है कि जहां बंगाल में 2026 में 90 फीसदी से ज्यादा वोटिंग हुई तो वहीं 2021 में 82.17 फीसदी कुल वोटिंग दर्ज हो पाई थी। 

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2021 में पश्चिम बंगाल में कुल 7.34 करोड़ मतदाता रजिस्टर हुए थे। हालांकि, इनमें से वोटिंग के लिए 6.03 करोड़ लोग ही पहुंचे थे। इसकी तुलना में अगर 2026 की बात करें तो इस बार राज्य में चुनाव आयोगी की तरफ से चलाई गई वोटर लिस्ट की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के बाद कुल 6.82 करोड़ वोटर पंजीकृत हुए। इनमें से कुल 6.25 करोड़ वोट अब तक दर्ज हुए हैं। यानी मतदाताओं के मामले में भी एसआईआर के बावजूद 2026 में मतदाताओं का 2021 का रिकॉर्ड टूट चुका है। 

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