चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल की 294 सीटों पर दो चरणों में चुनाव कराने की तैयारी कर रहा है। हिंसा रोकने और सुरक्षा पुख्ता करने के लिए यह कदम उठाया जा सकता है। ज्यादातर विपक्षी दलों ने भी कम चरणों में मतदान की मांग की है। इस पर अंतिम फैसला दिल्ली में होने वाली बैठक में होगा।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव दो चरणों में आयोजित किए जा सकते हैं। चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने गुरुवार को इस बात के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव की तारीखों और चरणों पर अंतिम मुहर नई दिल्ली में होने वाली अगली बैठक के बाद लगेगी। राज्य की कुल 294 विधानसभा सीटों के लिए मतदान प्रक्रिया अगले महीने से शुरू होने की उम्मीद है।
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कोलकाता में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ हुई बैठक में राज्य के ज्यादातर राजनीतिक दलों ने अपनी राय रखी थी। सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस को छोड़कर लगभग सभी पार्टियों ने चुनाव एक या दो चरणों में ही कराने की अपील की थी। सुरक्षा एजेंसियों और अन्य अधिकारियों ने भी इसी तरह के सुझाव दिए हैं। चुनाव आयोग का मानना है कि दो चरणों में मतदान कराने से चुनावी हिंसा पर लगाम लगाने में बड़ी मदद मिलेगी। इससे गड़बड़ी फैलाने वाले तत्वों को एक इलाके से दूसरे इलाके में जाने का मौका नहीं मिलेगा।
जब अधिकारी से पूछा गया कि क्या चुनाव एक ही चरण में हो सकते हैं, तो उन्होंने महाराष्ट्र का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि 2024 में महाराष्ट्र की 288 सीटों पर एक ही दिन में वोट डाले गए थे। बंगाल में भी एक चरण में चुनाव कराना असंभव नहीं है, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए इसकी संभावना बहुत कम है। चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना आयोग के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने चुनाव आयोग को आश्वासन दिया है कि मतदान से पहले और नतीजों के बाद भी सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चाक-चौबंद रहेगी।