भाजपा ने बंगाल की आउसग्राम सीट से घरेलू कामगार कलिता माझी को दोबारा टिकट दिया है। कलिता बर्तन मांजने का काम करती हैं। पीएम मोदी भी उनकी तारीफ कर चुके हैं। हालांकि, वोटर लिस्ट में उनका नाम विचाराधीन होने की बजह से टीएमसी ने सवाल उठाए हैं।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने 144 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। इस लिस्ट में कई बड़े नाम हैं, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा कलिता माझी की हो रही है। कलिता दूसरों के घरों में बर्तन मांजने का काम करती हैं। भाजपा ने उन्हें पूर्वी वर्धमान जिले की आउसग्राम सीट से अपना उम्मीदवार बनाया है। यह दूसरी बार है जब पार्टी ने उन पर भरोसा जताया है। इससे पहले 2021 के चुनाव में भी कलिता ने इसी सीट से चुनाव लड़ा था।
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कलिता माझी की आर्थिक स्थिति बहुत साधारण है। वह घरों में काम करके महीने के केवल तीन-चार हजार रुपये कमा पाती हैं। उनके पति सुब्रतो माझी प्लंबर का काम करते हैं। 2021 के चुनाव में हार मिलने के बाद कलिता वापस अपने पुराने काम पर लौट गई थीं। वह कई वर्षों से भाजपा की सदस्य हैं। उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि पार्टी उन्हें दोबारा टिकट देगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कलिता की मेहनत और स्वाभिमान की तारीफ कर चुके हैं। पीएम ने उन्हें राजनीति में एक मिसाल और समाज के लिए उम्मीद की किरण बताया था।
इस बार कलिता की उम्मीदवारी के साथ एक कानूनी विवाद भी जुड़ गया है। चुनाव आयोग की मतदाता सूची में उनका नाम विचाराधीन श्रेणी में रखा गया है। इसे लेकर तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा पर निशाना साधा है। टीएमसी का आरोप है कि भाजपा और चुनाव आयोग के बीच मिलीभगत है। हालांकि, कलिता ने साफ किया है कि उन्होंने सभी जरूरी कागज जमा कर दिए हैं और उन्हें चुनाव लड़ने में कोई दिक्कत नहीं आएगी। भाजपा ने भी टीएमसी के आरोपों को आधारहीन बताया है।
कलिता का कहना है कि वह खुद एक गरीब परिवार से हैं, इसलिए वह आम लोगों की समस्याओं को बेहतर समझती हैं। उनके मुख्य चुनावी मुद्दे स्वास्थ्य और शिक्षा हैं। वह अपने इलाके में एक अस्पताल बनवाना चाहती हैं ताकि गरीबों को इलाज के लिए दूर न जाना पड़े। साथ ही वह गरीब बच्चों को पढ़ाई के बेहतर मौके देना चाहती हैं। 2021 के चुनाव में कलिता को 88,577 वोट मिले थे और वह बहुत कम अंतर से हारी थीं। माना जा रहा कि यही वजह है कि भाजपा ने उन पर फिर से दांव लगाया है।