ममता बनर्जी औऱ शुभेंदु अधिकारी
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भाजपा पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को नंदीग्राम में ज्यादा समय देने पर मजबूर करने में सफल रही। गौरतलब है कि इसी सीट पर चुनाव लड़ चुकी ममता नामांकन के दिन को छोड़ कर अपना तीन दिन का समय दे चुकी हैं। ममता मतदान वाले दिन तक नंदीग्राम में ही मौजूद रहेंगी।
नंदीग्राम का नतीजा जो भी हो, मगर भाजपा का मानना है कि उसकी ममता को इस सीट पर घेरने की रणनीति सफल रही है। ममता को इस सीट पर घेरने के लिए ही भाजपा ने दीर्घकालिक रणनीति बनाई थी। सीट पर कांटे की टक्कर का संदेश देने के लिए ही भाजपा ने केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को यहां का प्रभारी बनाया। दो और केंद्रीय मंत्रियों को इसी सीट पर लगाने के अलावा संगठन के कई लोगों को यहीं जमे रहने का संकेत दिया। प्रधानमंत्री की रैली कराने के अलावा चुनाव प्रचार खत्म होने के चंद घंटे पहले गृह मंत्री अमित शाह का रोड शो भी कराया।
दरअसल टीएमसी के चुनाव प्रचार की सारी रणनीति ममता पर ही केंद्रित है। इसी को ध्यान में रख कर भाजपा ने उन्हें नंदीग्राम में ज्यादा से ज्यादा समय बिताने के लिए मजबूर करने की रणनीति बनाई। इसी रणनीति के तहत टीएमसी छोड़ कर भाजपा में आए शुभेंदु अधिकारी को न सिर्फ अपना उम्मीदवार बनाया, बल्कि अधिकारी के जरिए ममता को इस सीट पर चुनाव लड़ने की चुनौती भी दी। भाजपा की रणनीति हर चरण के बाद पार्टी को बढ़त मिलने का संदेश देने की है। पार्टी इसी रणनीति के सहारे आगे बढ़ रही है।
पहले भी अपनाई गई है यह रणनीति
राजनीति में पहले भी सबसे हैवीवेट उम्मीदवार को घेरने के लिए ऐसी ही रणनीति अपनाई जाती रही है। इसी रणनीति के तहत दिल्ली विधानसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल तत्कालीन सीएम शीला दीक्षित के खिलाफ नई दिल्ली सीट पर चुनाव लड़े थे। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में केजरीवाल भाजपा के पीएम पद के उम्मीदवार वर्तमान पीएम मोदी के खिलाफ वाराणसी सीट पर चुनाव लड़े थे। इसी साल और बीते लोकसभा चुनाव में भाजपा की वरिष्ठ नेता स्मृति ईरानी ने तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को अमेठी सीट पर चुनौती दी थी। इन सारे ही मामलों में प्रतिद्वंद्वी दल के सबसे बड़े नेता को उनकी अपनी ही सीट पर घेरने की रणनीति के तहत ऐसा किया गया था।