इस्राइल-अमेरिका-ईरान के युद्ध की आंच अब भारत पर पड़ने लगी है। फारस की खाड़ी में भारत के 28-30 जहाज, 778 नाविक फंस गए हैं। 67000 भारतीय फंसे हैं और उर्जा संकट सुलझाने के लिए विदेश मंत्री जयशंकर ने अपने समकक्ष के साथ चार बार से अधिक बात की है, लेकिन सूत्र बताते हैं कि भारत के हाथ अभी कुछ खास नहीं है।
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विदेश मंत्रालय के पास कूटनीतिक जवाब के अलावा कोई ठोस जवाब नहीं है। हालांकि कहा जा रहा है कि ईरान के विदेश मंत्री ने भारत के कुछ टैंकरों को जाने की अनुमति देने का भरोसा दिया है। भारत आने के लिए आठ से अधिक टैंकर तैयार हालत में हैं और उन्हें बस सिग्नल मिलने का इंतजार है। सुरक्षा मामलों के जानकार पूर्व एयर वाइस मार्शल एनबी सिंह कहते हैं कि स्थिति थोड़ा चिंताजनक हो रही है। बंदरगाहों पर जाम लगा है। निर्यात की रफ्तार सुस्त है और हमारे तमाम जहाज मध्य पूर्व एशिया में फंसे हैं। एनबी सिंह कहते हैं कि रेड सी ब्लॉक है। स्टेट ऑफ होर्मुज में ईरान की सहमति के बिना परिंदा के भी पास होने की गुंजाइश नहीं है। इसके कारण उर्जा संकट चुनौती पूर्ण बनता जा रहा है।
गुजरात के मोरबी में सिरेमिक उद्योग की लगातार चिंता बढ़ रही है। निर्यात रुका हुआ है और इसके कारण तमाम छोटी, मझोली इकाइंया संकट के दौर से गुजर रही हैं। इसके अलावा मुंबई और गुजरात के बंदरगाहों पर लाख टन से अधिक बासमती चावल, प्याज, अंगूर फंसे हैं। निर्यात की गड़ी सुस्त हो गई है और दो प्रमुख बंदरगाह पर जाम की स्थिति है।
पहले रूस से खरीदते थे कच्चा तेल और अब लगेगा समय
यूक्रेन के साथ युद्ध के बाद भारत ने रूस से भारी मात्रा में कच्चा तेल लेना शुरू किया था, लेकिन अमेरिका के दबाव में यह खरीद बहुत कम हो गई थी। विदेश मामले के जानकार रंजीत कुमार कहते हैं कि अब भारत ने फिर से पहल तेज की है। ऊर्जा सुरक्षा की जरूरतों को पूरी करना सबसे बड़ी चुनौती है। रूस से अब इस आपूर्ति को जरूरत के हिसाब से लाने में थोड़ा समय लगेगा। सबसे बड़ी समस्या एलपीजी की आपूर्ति को सुव्यवस्थित कर पाने की है। हालांकि प्रधानमंत्री मोदी, केन्द्रीय मंत्री हरदीप पुरी और विदेश मंत्री एस जयशंकर सभी का कहना है कि भारत में इस तरह की कोई समस्या नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी तो देश में एलपीजी की कमी को मानते ही नहीं। प्रधानमंत्री इस तरह की कमी को विपक्ष द्वारा खड़ा किया प्रोपेगैंडा करार दिया है।
कहां-कहां और पड़ रहा है असर?
स्टील उद्योग की परेशानी बढ़ रही है। इसके अलावा होटल, रेस्त्रां उद्योग की भी परेशानी बढ़ रही है। टाटा स्टील के वीरेश पाठक बताते हैं कि स्टील इंडस्ट्री में प्रोपेन/एलपीजी का बहुत उपयोग होता है। नेचुरल गैस की आपूर्ति में संकट की आशंका ने काफी चिंता में डाल रखा है। इसके कारण तमाम प्लांट सीमित क्षमता में काम कर रहे हैं। बताते हैं स्टेट ऑफ हार्मुज के रास्ते से भारत की जरूरत का 50 प्रतिशत से अधिक गैस इसी रास्ते से आती है। लेकिन इस रास्ते के बंद होने के कारण तमाम तरह की दिक्कतें सामने आ रही हैं।
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ईरान चाहता क्या है?
रणनीतिक और मध्य एशिया मामलों के जानकार सारांश मिश्रा का कहना है कि ईरान विश्व की सप्लाई चैन को बाधित करके अमेरिका पर दबाव बना रहा है। खाड़ी के देशों पर हमला करने के पीछे भी उसकी यही कोशिश है। इस बहाने वह अमेरिका पर आर्थिक, राजनैतिक और क्षेत्रीय चुनौती खड़ा करके चुनौती पेश कर रहा है। सारांश कहते हैं कि यही कारण है कि कुछ मित्र देशों को छोड़कर उसने विश्व के इस सबसे संकरे और लगातार व्यस्त रहते वाले व्यापारिक मार्ग को अवरुद्ध कर रखा है।