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West Asia: ईरान युद्ध में दिखी भारत की कूटनीतिक ताकत, एलपीजी संकट के बीच रूस के बाद यूएस से भी पहुंचा जहाज

Mon, 23 Mar 2026 08:22 AM IST
Nitin Gautam न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दुनियाभर में जारी कच्चे तेल और एलपीजी गैस के संकट के बीच अमेरिका और रूस दोनों भारत की मदद के लिए आगे आए हैं। दरअसल रूस से लाखों बैरल कच्चा तेल लेकर एक रूसी जहाज भारत पहुंचा था तो रविवार को एक अमेरिकी जहाज एलपीजी गैस लेकर भारत आया। 
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पश्चिम एशिया संकट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पश्चिम एशिया संकट के चलते दुनियाभर में कच्चे तेल और गैस की किल्लत हो गई है। इस संकट के बीच भारत ने अपनी कूटनीतिक ताकत दिखाई है। दरअसल रविवार को अमेरिका का कार्गो जहाज पिक्सिस पायनियर 16714 मीट्रिक टन एलपीजी गैस लेकर भारत के मंगलूरू बंदरगाह पहुंचा। इससे एक दिन पहले ही रूस का जहाज कच्चा तेल लेकर भारत के मंगलूरू बंदरगाह पहुंचा था। 
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रूस के बाद अमेरिका का जहाज भी भारत पहुंचा
अमेरिकी एलपीजी कार्गो जहाज पिक्सिस पायनियर ने 14 फरवरी को टेक्सास के पोर्ट ऑफ नेदरलैंड से यात्रा शुरू की थी और इसमें 16714 मीट्रिक टन लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) है, जिसे एजिस लॉजिस्टिक्स में उतारा गया। अमेरिकी जहाज के भारत पहुंचने से एक दिन पहले ही रूसी तेल टैंकर एक्वा टाइटन एक लाख टन से अधिक क्रूड ऑयल लेकर मंगलूरू पहुंच चुका है। यह टैंकर पहले चीन जा रहा था। हालांकि बाद में इसे भारत की ओर मोड़ दिया गया। इस टैंकर में करीब 7.7 लाख बैरल कच्चा तेल भरा है। 

होर्मुज के आसपास 700 जहाज फंसे
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास दुनिया के करीब 700 जहाज पिछले कुछ दिनों से फंसे हुए हैं। इसके चलते मध्य पूर्व एशिया से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में सप्लाई होने वाला करीब 20% कच्चा तेल नहीं पहुंच पा रहा है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। साथ ही एलपीजी का संकट भी गहरा रहा है। 
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मंगलूरू पोर्ट है खास
मंगलूरू में भारत की सबसे बड़ी भूमिगत एलपीजी स्टोरेज सुविधा है। यह स्टोरेज समुद्र तल से 225 मीटर नीचे स्थित है और इसकी क्षमता 80,000 मीट्रिक टन है। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका और रूस से लगातार आपूर्ति मिलने से देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और घरेलू एलपीजी स्टॉक को बनाए रखना आसान होगा। इस पूरी स्थिति से यह साफ होता है कि युद्ध और वैश्विक संकट के बीच भी भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए पूरी तैयारी के साथ काम कर रहा है।




 
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