पश्चिम एशिया में ईरान और इस्राइल-अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव भारत के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। इस संघर्ष में भारतीय नागरिकों के हताहत होने की खबरों और बमबारी की घटनाओं ने सरकार को सतर्क कर दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंजीत जायसवाल ने स्थिति पर विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि भारत सरकार तेजी से बदलती परिस्थितियों पर बारीकी से नजर रख रही है और अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।
यह भी पढ़ें -
Energy Crisis: सरकार का दावा- देश में तेल और गैस का संकट नहीं, राज्यों को जमाखोरी पर सख्ती के निर्देश
प्रधानमंत्री की ईरान के राष्ट्रपति से बातचीत
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार, प्रधानमंत्री ने हाल ही में ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेशकियन से फोन पर बातचीत की। इस वार्ता के दौरान, प्रधानमंत्री ने ईरान में मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और कल्याण को लेकर भारत की प्राथमिकताओं पर जोर दिया। उन्होंने ऊर्जा और सामग्री के पारगमन के महत्व को भी रेखांकित किया। प्रधानमंत्री ने क्षेत्र में सुरक्षा की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की और भारत के रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि इस मुद्दे को बातचीत और कूटनीति के माध्यम से जल्द से जल्द सुलझाया जाना चाहिए।
द्विपक्षीय और ब्रिक्स मुद्दों पर चर्चा
विदेश मंत्री ने भी ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से बातचीत की। दोनों मंत्रियों ने द्विपक्षीय मुद्दों के साथ-साथ ब्रिक्स से संबंधित मुद्दों पर भी चर्चा की। यह दर्शाता है कि भारत इस क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने और अपने हितों की रक्षा के लिए सभी संभावित कूटनीतिक माध्यमों का उपयोग कर रहा है।
ईरान से भारतीयों की वापसी
ईरान से बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक सुरक्षित लौट रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में, जिसमें आज का दिन भी शामिल है, 170 भारतीय नागरिकों ने आर्मेनिया के रास्ते भूमि सीमा पार की है। इनमें से कई भारत लौट आए हैं और बाकी आने वाले दिनों में वाणिज्यिक उड़ानों के माध्यम से भारत वापस आ जाएंगे।
समुद्री क्षेत्र में भारतीय नाविकों की स्थिति
शिपिंग मंत्रालय के अधिकारी राजेश कुमार सिन्हा ने खाड़ी क्षेत्र में भारतीय जहाजों और नाविकों की स्थिति पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि एलपीजी वाहक जहाजों को प्रमुख बंदरगाहों पर प्राथमिकता से बर्थिंग दी जा रही है। वर्तमान संकट और खाड़ी क्षेत्र की बदलती परिस्थितियों के मद्देनजर, दुर्भाग्यवश, भारतीय नाविकों से जुड़े तीन हताहतों की सूचना मिली है, जिनमें से एक नाविक अभी भी लापता है। इसके अतिरिक्त, चार नाविकों को मामूली चोटें आई हैं, जिन्हें चिकित्सा उपचार दिया जा रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम में, फारस की खाड़ी में, 24 भारतीय-ध्वजांकित जहाज 677 भारतीय नाविकों के साथ मौजूद हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य के पूर्व में, ओमान की खाड़ी में, पहले चार जहाज थे, जिनमें से एक जहाज अब क्षेत्र से निकल चुका है, जिससे तीन भारतीय-ध्वजांकित जहाज 76 भारतीय नाविकों के साथ इस क्षेत्र में बने हुए हैं। पूरे खाड़ी क्षेत्र में लगभग 23,000 भारतीय नाविक कई जहाजों पर कार्यरत हैं।
यह भी पढ़ें -
वैश्विक चुनौतियों से निपटने की तैयारी: सीतारमण बोलीं- सरकार ने बनाया एक लाख करोड़ का आर्थिक स्थिरीकरण फंड
मस्कट और बसरा में हुई घटनाएं
विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (खाड़ी) असीम महाजन ने मस्कट के सोहर शहर में हुई एक घटना का उल्लेख किया, जिसमें दो भारतीय नागरिकों की मृत्यु हो गई और 11 घायल हो गए, जिनमें से 10 भारतीय थे। घायलों में से पांच को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है, जबकि पांच स्थानीय अस्पतालों में भर्ती हैं। किसी भी गंभीर चोट की सूचना नहीं है। इसके अतिरिक्त, इराक के बसरा के पास एक जहाज 'सेफसी विष्णु' पर हुए हमले के संबंध में जानकारी दी गई। जहाज के 15 चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित निकाल लिया गया है और वे बसरा के एक होटल में ठहरे हुए हैं। मृत भारतीय नागरिक के पार्थिव शरीर को वापस लाने और शेष 15 नाविकों की सुरक्षित स्वदेश वापसी के प्रयास जारी हैं।
अन्य वीडियो