राष्ट्रपति भवन में वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण के लिए पहल 'सम्मान के साथ वृद्धावस्था' कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि बुजुर्ग अतीत से जुड़े होते हैं और भविष्य के मार्गदर्शक भी हैं। उन्होंने सभी नागरिकों से बुजुर्गों की खुशी और भलाई के लिए खुद को प्रतिबद्ध करने, उनके मार्गदर्शन को महत्व देने और उनकी मूल्यवान संगति का आनंद लेने का आग्रह किया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण के लिए पहल - 'सम्मान के साथ वृद्धावस्था' कार्यक्रम में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि, माता-पिता और बड़ों का सम्मान करना हमारी संस्कृति में है। वरिष्ठ नागरिक, परिवार और समाज का आदरणीय अंग हैं। राष्ट्रपति ने आगे कहा - आज के प्रतिस्पर्धा वाले और तेज रफ्तार भरी जिंदगी में हमारी युवा पीढ़ी के लिए वरिष्ठ नागरिकों का साथ, प्रेरणा और मार्गदर्शन अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनके पास अनुभवों और ज्ञान का भंडार है, जो युवा पीढ़ी को जटिल चुनौतियों का सामना करने में मदद कर सकता है।
'बुजुर्गों का बेहतर स्वास्थ्य परिवार-समाज के लिए जरूरी'
राष्ट्रपति ने आगे कहा- वृद्ध लोगों का अच्छा स्वास्थ्य परिवार और समाज के उचित मार्गदर्शन के लिए आवश्यक है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा चलाई जा रही अटल वयो अभ्युदय योजना, अव्यय भी वरिष्ठ नागरिकों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से की गयी एक व्यापक पहल है। राष्ट्रपति ने कहा- वरिष्ठ नागरिक अतीत से जुड़ने की कड़ी हैं और भविष्य के मार्गदर्शक भी हैं। हमारे वरिष्ठ नागरिक, वृद्धावस्था का समय सम्मान और सक्रियता के साथ बिताएं, एक राष्ट्र के रूप में, यह सुनिश्चित करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
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सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की सराहना
उन्होंने कहा, 'हमारे वरिष्ठ नागरिक ज्ञान, विवेक और परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनकी गरिमा और स्वास्थ्य की रक्षा करना हम सबका साझा कर्तव्य है। हमें उनके साथ समय बिताना चाहिए, उनके मार्गदर्शन को महत्व देना चाहिए और उनके साथ के पलों को संजोना चाहिए।' राष्ट्रपति ने सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की उन पहलों की सराहना की, जो बुजुर्गों के जीवन को गरिमापूर्ण बनाने के लिए शुरू की गई हैं। उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों के लिए शुरू किए गए नए डिजिटल पोर्टल की भी तारीफ की और कहा कि यह उनकी सभी जरूरतों का 'वन-स्टॉप प्लेटफॉर्म' बनेगा।
राष्ट्रपति मुर्मू ने भारतीय संस्कृति में बुजुर्गों के प्रति सम्मान की परंपरा को भी याद दिलाया। उन्होंने कहा, 'हमारे संस्कारों में माता-पिता और बुजुर्गों के प्रति सम्मान निहित है। घर में दादा-दादी, नाना-नानी के साथ बच्चे सबसे ज्यादा खुश रहते हैं। कई बार जो बात बच्चे माता-पिता से नहीं मानते, वही बात दादा-दादी से खुशी-खुशी मान लेते हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि बुजुर्ग परिवारों को भावनात्मक और मानसिक सहारा देते हैं। 'जब बुजुर्ग अपने परिवार को खुशहाल देखते हैं, तो उनका स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है। वे परिवार के भावनात्मक स्तंभ होते हैं'।