सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के कई आदेशों के बावजूद भी आगरा में प्रदूषण कम नहीं हुआ है। यहां की हवा पूरे प्रदेश में सबसे दूषित है, वहीं यमुना भी नाले का रूप लेती जा रही है। प्रदूषण से सर्वाधिक नुकसान ऐतिहासिक धरोहरों पर पड़ रहा है। जांच में पाया गया है कि प्रदूषण से ताजमहल की सेहत बिगड़ रही है।
उल्लेखनीय है कि प्रदूषण के कारण ही काइरोनोमस कीड़ों ने ताज की दीवारों को हरे रंग में रंग दिया था। अब प्रदूषण की सीधी मार ताज की मीनारों और गुंबद पर पड़ रही है। यह कार्बन कणों की वजह से पीले और भूरे हो चुके हैं। यह पहला मौका है जब ताजमहल के पास की हवा भी जहरीली हो गई है और पानी भी। अटलांटा विश्वविद्यालय, आईआईटी रुड़की और एएसआई केमिकल ब्रांच की जांच में ताजमहल पर कार्बन कणों के साथ बायोमास मिला। इसकी वजह से ताज पीला और भूरा पड़ चुका है।
हालांकि एएसआई केमिकल ब्रांच ने ताज पर मडपैक ट्रीटमेंट किया तो उसकी असली चमक सामने आई। एएसआई अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ. भुवन विक्रम के मुताबिक, जब तक वायु प्रदूषण पर अंकुश नहीं लगता तब तक ताज की सफाई करना बेकार है। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ताजा रिपोर्ट में आगरा सबसे प्रदूषित शहर घोषित किया जा चुका है।
बॉक्स-
दिल्ली से ही दूषित है यमुना
4 जून ओखला वजीराबाद मथुरा विश्राम घाट ताजमहल पेयजल मानक
बीओडी 11.2 5.53 6.80 17 2 से कम
डीओ -0.9 6.98 5.60 0.2 6 से ज्यादा
पीएच 7.06 7.9 7.3 7.5 6.5
कोलीफोर्म - - 1.13 लाख 7 लाख 50/100 मिली
कीड़ों ने हरा किया ताज फिर भी गंभीर नहीं सरकार
यमुना में भारी प्रदूषण के कारण गोल्डी काइरोनोमस कीड़े का हमला ताज पर 20 अप्रैल से होना शुरू हुआ। हैरान करने वाली बात यह है कि 45 दिन बाद भी राज्य सरकार यमुना नदी में कीड़ों के पनपने की मुख्य वजह को दूर नहीं कर पाई है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण केमिकल ब्रांच, वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी, देहरादून और आईआईटी कानपुर जैसे तकनीकी संस्थान यमुना में भारी प्रदूषण को कीड़ों के हमले का जिम्मेदार बता चुके हैं। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट मानिटरिंग कमेटी के सदस्य डीके जोशी ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में याचिका भी दायर की। एनजीटी तीन बार उत्तर प्रदेश सरकार को यमुना नदी में सफाई करने की हिदायत देने के साथ फटकार भी लगा चुका है। बावजूद इसके किसी भी आदेश का असर होता नहीं दिख रहा है।
इस मामले में याचिकाकर्ता डीके जोशी का कहना है कि‘आगरा की हवा जहरीली है, लेकिन अधिकारी कागजी प्रतिबंध लगाने के अलावा प्रदूषण रोकने की दिशा में गंभीर नहीं है। सर्वोच्च अदालत तक को गुमराह कर रहे हैं। ताजमहल का भविष्य भी संकट में है।’