CJI: चीफ जस्टिस बीआर गवई ने कहा कि वह खबरें और यूट्यूब इंटरव्यू नहीं देखते, इसलिए ईडी के खिलाफ बनाई गई बातों से प्रभावित नहीं होते। एक मामले में ईडी ने वरिष्ठ वकीलों को कानूनी सलाह देने पर समन भेजा था, जिस पर केंद्र सरकार ने जांच एजेंसी को नोटिस न देने का निर्देश दिया। सीजेआई ने माना कि कुछ मामलों में ईडी ने अपनी सीमा से बाहर जाकर काम किया है, लेकिन कोर्ट खुद इस पर नजर रखता है।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के खिलाफ बनाई जा रही बातों से सुप्रीम कोर्ट को प्रभावित न होने की अपील पर चीफ जस्टिस (सीजेआई) बीआर गवई कहा, हम न तो खबरें देखते हैं और न ही यूट्यूब इंटरव्यू देखते हैं। जस्टिस गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच एक स्वत: संज्ञान मामले पर सुनवाई कर रही थी। इस मामले में ईडी ने वरिष्ठ वकीलों अरविंद दातार और प्रताप वेणुगोपाल को उनके उनके मुवक्किलों को कानूनी सलाह देने केल लिए समन भेजा गया था।
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केंद्र सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए। उन्होंने कहा कि इस मामले को सर्वोच्च स्तर पर उठाया गया है और जांच एजेंसी को निर्देश दिया गया है कि वो केवल कानूनी सलाह देने वाले वकीलों को नोटिस जारी न करे। हालांकि, मेहता ने यह भी कहा कि संस्थाओं को बदनाम करने के लिए झूठी कहानियां बनाई जा रही हैं।
उन्होंने कहा, जहां तक आम टिप्पणियों की बात है, कभी-कभी उन्हें गलत समझा जाता है, यह हर मामले पर निर्भर करता है। मैं यह कह रहा हूं, ईडी नहीं। एक सुनियोजित कोशिश की जा रही है कि किसी संस्था के खिलाफ कहानी तैयार की जाए।मिलॉर्ड को कुछ ही मामलों में ओवरस्टेपिंग (संस्था या अधिकारी जब अपनी सीमा से बाहर जाए) दिखाई देगा।
इस पर सीजेआई गवई ने कहा, हमें भी कई मामलों में ईडी की ओर से ऐसी ओवरस्टेपिंग देखने को मिल रही है। ऐसा नहीं है कि हमें कुछ दिखाई नहीं दे रहा। सीजेआई गवई ने यह भी कहा, हम खबरें नहीं देखते; यूट्यूब इंटरव्यू भी नहीं देखते। सिर्फ पिछले हफ्ते कुछ फिल्में देखने का मौका मिला था। जस्टिस गवई एक हफ्ते तक बीमार थे।