फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Gandhian value: गांधीवादी मूल्यों का करें सम्मान

Sun, 29 Jan 2023 05:13 AM IST
Amit Mandal राजेश कुमार चौहान, जालंधर

सार

आज अगर हरेक भारतीय, चाहे वो सत्ताधारी हो, अभिनेता हो या फिर आम आदमी हो, महात्मा गांधी की बातों का अनुसरण करे, तो देश में धर्म और जाति समेत अन्य भेदभाव खत्म हो जाएं।
विज्ञापन
महात्मा गांधी - फोटो : Facebook/MokamOfficial
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

जनवरी को महात्मा गांधी की पुण्यतिथि है। गांधी जी के आदर्श, सामाज को एक अच्छी राह पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं। महात्मा गांधी देश प्रेमी ही नहीं, बल्कि प्रकृति और जीव जंतुओं की रक्षा के प्रति अहिंसा प्रेमी भी थे। ऐसे ही नहीं दुनिया उनको महात्मा गांधी के नाम से पुकारती है। सामाजिक कार्यों में उनके योगदान को  आज भी याद किया जाता है।

विज्ञापन


आज भारत में बहुत से ऐसे लोग भी हैं, जिन्हें आजादी की पकी-पकाई खीर मिली है। वे गांधी जी द्वारा अहिंंसा के जरिए आजादी दिलवाने के नाम पर ही सवाल खडे़ कर देते हैं। महात्मा गांधी ने अहिंसा की राह चलते हुए भारतीयों को आजादी की लड़ाई लड़ने के लिए एकजुट किया था, विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करने के लिए प्रेरित किया था, जो कि आजादी की लड़ाई के लिए महत्वपूर्ण आंदोलन थे।

आज अगर हरेक भारतीय, चाहे वो सत्ताधारी हो, अभिनेता हो या फिर आम आदमी हो, महात्मा गांधी की बातों का अनुसरण करे, तो देश में धर्म और जाति समेत अन्य भेदभाव खत्म हो जाएं। समाजिकता के गिरते स्तर में सुधार हो जाए और पर्यावरण संभालने के प्रति लोग गंभीर हो जाएं, लेकिन शायद ही ऐसा हो, क्योंकि आज स्वार्थ लगभग लोगों के सिर चढ़ चुका है।
विज्ञापन


महात्मा गांधी सभी पंथों का सम्मान करते थे। उन्होंने हर धर्म और जाति को आपस में जोड़ने का काम किया था। गांधी जी ने राष्ट्रवाद पर जोर दिया था। उनके अनुसार, राष्ट्रवादी हमेशा जात, धर्म और नस्ली भेदभाव से ऊपर की सोच रखता है। आज जिस तरह दुनिया हिंसा, नफरत, वैर-विरोध और स्वार्थ जैसी व्याधियों के दलदल में धंसती जा रही है, वो दुनिया के लिए जरा भी उचित नहीं है। इन व्याधियों को जड़ से उखाड़ने के लिए दुनिया को गांधीवादी मूल्यों को अपनाने का समय आ चुका है, लेकिन अफसोस तो इस बात का है कि जब बापू के देश के लोग ही इनके मूल्यों को अपनाने को या इनकी राह चलने को तैयार नहीं तो हम यह कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि दुनिया गांधीवादी मूल्यों को अपनाएगी?

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें