ईडी अब बंगाल शिक्षक घोटाला मामले में गिरफ्तार पूर्व मंत्री की सहयोगी अर्पिता मुखर्जी से जुड़ी तीन कंपनियों की जांच करने में जुट गई है। ईडी सूत्रों का मानना है कि इस जांच से कई से राज खुल सकते हैं। जांच एजेंसी को संदेह है कि पार्थ के साथ करीबी बनने के बाद अर्पिता को इन कंपनियों का निदेशक बनाया गया था। बताया जा रहा है कि इन सभी फर्मों के निदेशक और बिजनेस पार्टनर कल्याण धर भी हैं।
हालांकि, अर्पिता ईडी अधिकारियों के समक्ष कह चुकी है कि उसे घरों से बरामद कैश पार्थ चटर्जी का है, जबकि पार्थ कह चुके हैं कि वे षड्यंत्र का शिकार हुए हैं। ईडी सूत्रों मिली जानकारी के मुताबिक अर्पिता की जिन तीन कंपनियों की जांच ईडी जांच करने में जुटी है, उनमें पहली है सिम्बायोसिस मर्चेंट्स प्राइवेट लिमिटेड। दस्तावेजों के अनुसार, अर्पिता को 21 मार्च 2011 को निगमित कोलकाता स्थित एक फर्म सिम्बायोसिस मर्चेंट्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया था। फर्म को विभिन्न प्रकार के सामानों के थोक के कारोबार में शामिल दिखाया गया था।
अर्पिता के साथ कल्याण धर को भी 1 जुलाई 2021 को कंपनी का निदेशक बनाया गया था। जानकारी के मुताबिक, 9 नवंबर 2011 को अर्पिता को फर्म सेंट्री इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया था। दिलचस्प बात यह है कि इस फर्म को 2001 में एक करोड़ रुपये की अधिकृत शेयर पूंजी के साथ शामिल किया गया था। हालांकि, 2011 में अर्पिता की निदेशक के रूप में नियुक्ति के बाद, कल्याण धर को भी 2018 में निदेशक बनाया गया था। अभी तक, इस फर्म में केवल दो निदेशक हैं - अर्पिता और कल्याण धर। कागजों पर यह फर्म विशेष प्रयोजन मशीनरी के निर्माण में शामिल है।
इसी तरह से जो जानकारी मिली है, उसके अनुसार 29 अक्तूबर 2014 को अर्पिता को एचए एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी का निदेशक अर्पिता मुखर्जी को बनाया गया था। दिलचस्प बात यह है कि इस कंपनी के दूसरे निदेशक कल्याण धर को उसी वर्ष नियुक्त किया गया था जब उन्हें अर्पिता के साथ सेंट्री इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक बनाए गए थे।