सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को सूखा क्षेत्र में स्थित शराब की फैक्ट्रियों में पानी की आपूर्ति पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने का निर्देश देने से इनकार किया है। याचिका में शराब फैक्ट्रियों में पानी की आपूर्ति पूरी तरह बंद कर उसे सूखाग्रस्त इलाकों में डायवर्ट करने की गुहार की गई थी।
न्यायमूर्ति पीसी पंत और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की अवकाशकालीन पीठ ने याचिकाकर्ता संजय काले की खिंचाई करते हुए कहा कि सिर्फ लोकप्रियता हासिल करने के लिए शीर्ष अदालत का दरवाजा नहीं खटखटाया जाना चाहिए।
पीठ ने कहा कि बांबे हाईकोर्ट ने इस संबंध में अंतरिम आदेश पारित किया है। पीठ ने याचिकाकर्ता से कहा कि आप हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश पर सुप्रीम कोर्ट क्यों आएं। हाईकोर्ट ने पहले ही ६० पीसदी पानी की आपूर्ति में कटौती करने का निर्देश दिया है। इससे अधिक आप और क्या चाहते हैं?
वहीं याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि राज्य में सूखे की स्थिति बहुत भयावह है और पानी को डायवर्ट करने को लेकर नीति है। इस पर पीठ ने कहा कि यह नीतिगत मामला है और अदालत को सरकार के कामकाज में दखल नहीं देना चाहिए। पीठ ने यह भी कहा कि ६० फीसदी की कटौती करने का भी कोई आधार नहीं दिखता।
अदालत का रुख भांपते हुए याचिकाकर्ता ने याचिका वापस करने की गुहार लगाई, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। हालांकि शीर्ष अदालत ने कहा कि वह चाहे तो हाईकोर्ट जा सकते हैं।
मालूम हो कि पिछले दिनों बांबे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ ने राज्य में सूखे की स्थिति को देखते हुए महाराष्टï्र सरकार से कहा था कि १० मई से २७ जून तक शराब फैक्ट्रियों को होने वाली पानी आपूर्ति में ६० फीसदी की कटौती की जाए।