भीषण गर्मी के बीच भारत में बढ़ता जल संकट देश की साख (कर्ज क्षमता) के लिए हानिकारक है। इस संकट के कारण न सिर्फ खाने- पीने की वस्तुओं की कीमतें बढ़ेंगी बल्कि लोगों की आय में गिरावट भी आएगी। इन वजहों से देश में सामाजिक अशांति का खतरा उत्पन्न हो सकता है। मूडीज रेटिंग्स ने मंगलवार को जारी 'भारत के समक्ष पर्यावरणीय जोखिम' रिपोर्ट में कहा, भारत की तेज आर्थिक वृद्धि, तीव्र औद्योगिकीकरण और शहरीकरण के कारण दुनिया के सबसे अधिक • आबादी वाले देश में पानी की उपलब्धता कम हो जाएगी। यह संकट ऋण क्षमता के लिहाज से उन क्षेत्रों के लिए भी हानिकारक है, जो पानी का भारी मात्रा में इस्तेमाल करते हैं। जैसे... कोयले से बिजली बनाने वाली कंपनियां और इस्पात निर्माता। यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है, जब राष्ट्रीय राजधानी के कुछ हिस्सों में जल संकट एक राजनीतिक मुद्दा बन गया है।
और भी बदतर हो रहे हालात
रेटिंग एजेंसी ने कहा, जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव तेजी से बढ़ने की वजह से जल संकट और भी बदतर हो रहा है। यानी भारत में पानी की कमी बढ़ती जा रही है। इससे सूखा, लू और बाढ़ जैसी जलवायु संबंधी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों के कारण लगातार बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं के अलावा तेज आर्थिक वृद्धि भी पानी की खपत को बढ़ा रही है।
1700 क्यूबिक मीटर से कम स्तर जल संकट को दर्शाता है
जल संसाधन मंत्रालय के आंकड़ों के हवाले से मूडीज ने कहा, भारत की प्रति व्यक्ति औसत सालाना जल उपलब्धता 2031 तक घटकर 1,367 क्यूबिक मीटर रह जाने की आशंका है। यह 2021 में पहले से ही कम 1,486 क्यूबिक मीटर है। मंत्रालय के मुताबिक, 1,700 क्यूबिक मीटर से कम का स्तर जल संकट को दर्शाता है।
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेटेरोलॉजी के मुताबिक, मानसूनी बारिश कम हो रही है। 1950-2020 के दौरान हिंद महासागर में प्रति शताब्दी 1.2 डिग्री सेल्सियस की दर से तापमान बढ़ा है। 2020-2100 के दौरान यह बढ़कर 1.7-3.8 डिग्री सेल्सियस पहुंच जाएगा।
समस्या से निपटने के उपाय जल प्रबंधन में निवेश जरूरी
मूडीज ने कहा, लंबी अवधि में जल प्रबंधन में निवेश के जरिये ही संभावित पानी की कमी से पैदा होने वाले जोखिमों को कम किया जा सकता है। विश्व बैंक की फरवरी, 2023 की रिपोर्ट के मुताबिक, उसने पिछले एक दशक में ग्रामीण समुदायों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के भारत सरकार के प्रयासों का समर्थन किया है। 1.2 अरब डॉलर की कुल फंडिंग वाली कई परियोजनाओं के जरिये दो करोड़ से अधिक लोगों को फायदा हुआ है।
1.8 अरब डॉलर का आर्थिक नुकसान
एसबीआई के अनुमान के मुताबिक, 2023 में उत्तर भारत में आई बाढ़ और गुजरात में चक्रवात बिपरजॉय की वजह से बुनियादी ढांचे को काफी नुकसान हुआ। इससे देश की अर्थव्यवस्था को
1.2-1.8 अरब डॉलर का झटका लगा।